कोरोना को लेकर अच्छी खबर! रेलवे ने 20 हजार बोगी कर ली है तैयार कभी भी बनाया जा सकता है इन्हें हॉस्पिटल

इसके अलावा सभी रेल कोच कारखाने 300 से अधिक प्रतिदिन रेल कोच बनाने का युद्ध स्तर पर काम कर रहे हैं

रेलवे युद्धस्तर पर बना रहा कोरोना से लड़ने का कई सामान, देश भर में कहीं भी भेज सकता है अस्पताल बने 20 हजार कोच

प्रखर विशेष। दुनिया भर में कोरोनावायरस के रूप में फैल चुकी महामारी विश्व की एक तिहाई आबादी लॉक डाउन कंडीशन में आ चुकी है। वहीं भारत में पूर्ण रूप से लाभ डाउन कर दिया गया है। साथ ही भारत में भी कोरोना के मामले दिनों दिन बढ़ते जा रहे हैं। साथ ही बड़ा सवाल यह है कि भारत में स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था उतनी अच्छी नहीं है, जितनी अन्य देशों में है । जिसको लेकर भारतीयों के साथ साथ प्रधानमंत्री व अन्य लोग भी परेशान हैं। इसी बीच एक राहत की खबर आई है कि रेलवे ने अपने 20000 बोगियों को हॉस्पिटल में तब्दील कर चुका है, सिर्फ सरकार के आदेश के बाद इनका प्रयोग किया जा सकता है। साथ ही यह ऐसे हस्पताल होंगे, जिन्हें भारत के किसी भी कोने में भेजा जा सकता है। जिसके बाद से बड़ी राहत की खबर है। साथ ही सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 20000 कोचों में प्रति बोगी करीब 60 मरीजों को रखे जाने का अनुमान लगाया जा रहा है। इस हिसाब से कुल 12 लाख बेड तैयार हो चुके हैं, सिर्फ सरकार के आदेश का इंतजार रहेगा यह रेलवे का कहना है। साथ ही रेलवे ने तमाम तरह के सर्जिकल इंस्ट्रूमेंट मास्क इत्यादि बनाने का काम युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया है, जो कोरोना से लड़ने में कारगर सिद्ध होगा। बतादे कि 4 दिन पहले से ही रेलवे फेस मास्क, कोट, ग्लव्ज, सैनेटाइजर जैसे जरूरी सामान का निर्माण शुरू कर दिया है और अब रेलवे ने एक और बड़ी तैयारी कर ली है। रेलवे ने कोरोना को देखते हुए अपने 20 हजार कोच ऐसे तैयार किए हैं जिन्हें कभी भी अस्पताल में तब्दील किया जा सकता है। खास बात ये है कि इन कोच को कभी भी कहीं भी रेलवे भेज सकता है। इसके साथ ही रेलवे ने अपने अस्पतालों को भी पूरी तरह से तैयार8 कर लिया है। इस बुरे समय में लोगों की मदद के लिए रेलवे की 7 हजार मालगाड़ियां हर दिन खाने-पीने और अन्य जरूरी वस्‍तुएं लोगों तक पहुंचाने का काम कर रही हैं। वही शुक्रवार को रेलवे के वाल्टेयर डिवीज़न में फेस मास्क, कोट, ग्लव्ज, साइड स्टूल और बेड के साथ एक मॉक ड्रिल की गई. इस मॉक ड्रिल में स्थानीय प्रशासन के अफसरों को भी शामिल किया गया। इस दौरान रेलवे ने जानकारी देते हुए बताया कि रेलवे बोर्ड की तरफ से 24 मार्च को ही अपनी सभी प्रोडक्शन यूनिट्स के जनरल मैनेज को हॉस्पिटल बेड, मेडिकल ट्राली, ड्रिप स्टैंड, स्ट्रेचर, हॉस्पिटल फुट स्टेप, बेड साइड लॉकर, वाश बेसिन, मास्क, सैनिटाइजर, वाटर टैंक वगैरह बनाने की तैयारी करने को कह दिया गया था। 25 मार्च को ही रेलवे के कई वर्कशॉप और कोचिंग डिपो ने सैंकड़ों लीटर सैनेटाइजर बनाकर इसे जरूरी जगहों पर बंटवाया था। वही रेलवे का कहना है कि जरूरत के हिसाब से सरकार का आदेश मिलते ही रेलवे अपने 20 हजार कोच को आइसोलेशन सेंटर बनाने को तैयार है। उसके सभी प्रोडक्शन यूनिट्स को जरूरत के हिसाब से इंटीरियर बदलकर कोच बनाने के लिए तैयार रहने को कहा गया है। जिससे कि कोच को हॉस्पिटल और मरीजों को फौरन भर्ती कर इलाज के लिए देशभर में कहीं भी इस्तेमाल में लाया जा सके। सूत्रों के मुताबिक फिलहाल रेलवे कोच बनाने वाली तीनों फैक्ट्री मॉडर्न कोच फैक्ट्री, रायबरेली, इंटीग्रल कोच फैक्ट्री, चेन्नई और रेल कोच फैक्ट्री, कपूरथला में रोज़ाना करीब 300 कोच बनाए जा सकते हैं। जरूरत के हिसाब से इसे बढ़ाया भी जा सकता है। लोगों के बीच सोशल डिस्टनसिंग का मकसद पूरा हो सके इसके लिए रेलवे ने कई जगह अपनी जमीन पर सब्ज़ी, फल वगैरह के बाजार लगाने की भी अनुमति दे दी है, जिससे की भीड़ को कम किया जा सके। इसके अलावा रेलवे की करीब 7000 मालगाड़ियां दिन रात गेहूं, चावल, आटा, आलू, दाल, नमक, चीनी, सब्ज़ी, खाद्य तेल, दूध,फल, कोयला और बहुत सारी ज़रूरी चीजों की ढुलाई के लिए दिन रात पटरी पर दौड़ रही हैं।