ग़ाज़ीपुर- कोई तो आगे आए, बीमार पति की दवा मंगाए!

– दो वर्ष पहले किडनी का हुआ था प्रत्यारोपण। दवा मुंबई या लखनऊ से आनी है।
– मरीज ने सामाजिक कार्यकर्ता से लगाई गुहार।
– पत्नी ने पति को दिया था दान में किडनी।
– दवा ना पहुंचने से जीवन को हो सकता है खतरा।

प्रखर ब्यूरो ग़ाज़ीपुर। लॉक डाउन के वजह से विनोद चौहान की दवा मुंबई से नहीं आ पा रही है। दो साल पहले मुंबई के चेंबूर स्थित डॉ. विश्वनाथ विला नेफ्रोलॉजी कंसल्टेंट्स नेफ्रोलॉजी एंड किडनी ट्रांसप्लांट चेंबूर हॉस्पिटल से उनकी किडनी प्रत्यारोपित हुई थी। इस दौरान उनके पास केवल पांच, छ: दिन की दवाएं ही और शेष बची हैं। दवा न पहुंचने से उनके बहुमूल्य जीवन को खतरा उत्पन्न हो सकता है।
मामला जखनिया विकासखंड व तहसील के बगल वाले गांव दामोदरपुर बहेरा का है। जब दवा मंगाने की सारी उम्मीद पर लाक डाउन की वजह से विराम लग गया तो 35 वर्षीय विनोद चौहान ने समग्र विकास इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष ब्रज भूषण दुबे से संपर्क साधा और दवा मंगाने के लिए गुहार लगाई। जानकारी होने के बाद शुक्रवार को ब्रज भूषण दुबे विनोद चौहान के घर बहेरा (जखनिया) पहुंचे। इस दौरान उन्होंने विनोद चौहान की पत्नी रिंकू को भी बधाई दिया, जिन्होंने बहादुरी का परिचय देते हुए अपने पति को किडनी दान में दिया था। ज्ञात हो कि विनोद की तीन नाबालिक बेटियां भी हैं और उनकी आर्थिक स्थिति बहुत खराब है। खेत बेचकर उन्होंने अपना इलाज किसी प्रकार कराया। ब्रज भूषण दुबे ने बताया कि उनके द्वारा पूरा मामला प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी एवं स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह के अलावा देश के प्रधानमंत्री को भेजा जा रहा है। वैसे भी किडनी के मरीजों के लिए करोना का वायरस कहर बनकर टूटता है। उन्होंने उम्मीद जताया कि लखनऊ के संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में यह दवाएं मिल सकती हैं, यदि नहीं तो मुंबई से इन्हें मंगाना पड़ेगा, जिसकी जिम्मेदारी राज्य की है। संविधान में प्रदत्त विनोद चौहान के जीने के अधिकार के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ी जाएगी। उक्त अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता परमानंद चौहान, गुल्लू सिंह यादव, धर्मेंद्र कुमार चतुर्वेदी एवं बृजेश कुमार पांडे उपस्थित थे।