ग़ाज़ीपुर- आत्मा की पाकीजगी और गुनाहों से तौबा करने का महीना है रमजान

प्रखर ब्यूरो सेवराई/ग़ाज़ीपुर। रमजान सिर्फ रहमतो और बरकतो की बारिस का महीना नही है बल्कि सारी मानवजाती को प्रेम, आपसी भाईचारा और इंसानियत का संदेश देता है। मौजूदा हालात में रमजान का संदेश और भी अहम हो गया है। रमजान पर जब मर्सी केयर फाउंडेशन के अध्यक्ष दस्तगीर खान से बात की गई तो उन्होंने बताया कि इस पाक महीने मे अल्लाह अपने बंदो पर रहमतो और बरकतो का खजाना खोल देता है। भुखे प्यासे रह कर खुदा की इबादत करने वालो के गुनाह माफ हो जाते है। इस पाक महीने मे दोज़ख के दरवाजे बंद कर दिया जाता है और जन्नत के दरवाजे खोल दिया जाता है। रमजान का महीना खैर व बरकत का महीना है। इस महीने मे हर घर मे कुरान की बरकते नाजील होती है। अल्लाह के रसुल पैगंबर रसुल हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने रमजान के महीने को शहरुल मुवासल कहा है, क्योकि रमजान के महीने मे निजात ही निजात है। इस मुबारक महीने मे खुदा के रहमत की वर्षा होती है। रमजान के रोजे का मकसद दरअसल गुनाहों से बचना होता, रोजा का मकसद भूख प्यास पर नियंञण रखना नही है, बल्कि रोजे की रुह दरअसल आत्मसंयम, अल्लाह के प्रति अकीदत और सही राह पर चलने का संक्लप है। साथ ही यह महीना अपने अंदर झांकने और खुद को आकने का महीना है। रमजान का महीना इसलिए भी अहम है क्योंकि अल्लाह ने इसी माह मे हिदायत की सबसे अहम किताब यानी की कुरआन शरीफ को दुनिया मे अवतरण किया था। रोजा एैसी रुहानी इबादत है जो इंसान को बहुत ऊचे स्थान पर पहुंचाती है। रमजान वह मुकद्दर महीना है जिसका दुनिया भर के करोडो लोग प्रतीक्षा करते है। रमजान के इस पवित्र महीने मे एक अत्यंत सुन्दर दृश्य देखने को मिलता है कि सभी मुसलमान रोजा नमाज और अन्य इबादतो मे व्यस्त हो जाते है, जबकि इस साल रमजान मे कोरोना वायरस महामारी से दुनिया भऱ मे लॉकडाउन के कारण रमजान की ईबादत और नमाज की अदायगी घरो से हो रही है, कहीं बाहर या दूसरों के घर आ-जा नहीं सकते, सोशल डिस्टेसिंग का पूरा ख्याल रखा जा रहा है। इस रमजान मे अल्लाह सबकी हिफाज़त करे और इस मुबारक महीने में सारी दुनिया को इस वबा(महामारी) से निज़ात दे।