ग़ाज़ीपुर- श्रम कानूनो को खत्म करने के विरोध में मनाया गया अखिल भारतीय विरोध दिवस

 

प्रखर ब्यूरो ग़ाज़ीपुर। उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड मेडिकल एंड सेल्स रिप्रजेंन्टेटिव एसोशिएसन ग़ाज़ीपुर इकाई द्वारा सीटू, एफएमआरएआई तथा विभिन्न केन्द्रिय श्रमिक संगठनो के अह्वान पर गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, उड़ीसा, सहित कई राज्य सरकारो द्वारा सभी श्रम कानूनो को खत्म करने के विरुद्ध आज अखिल भारतीय विरोध दिवस के रुप मे मनाया गया। उक्त कार्यक्रम के अवसर पर ज़िलाध्यक्ष मयंक श्रीवास्तव ने अपने सभी साथियो से कहा कि जिन श्रम कानूनों के बदौलत मजदूर तबको के साथ साथ विभिन्न निजी क्षेत्रों में जो भी कर्मचारी काम कर रहे है, सरकार के श्रम कानूनों के रद्द करने के फैसले से उनकी रोजी रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा। आने वाले समय मे प्रबंधन और मालिकान को अपनी मनमर्जी करने की पूरी छूट मिल जाएगी, जिससे वो जब चाहेंगे जिसे चाहेंगे नौकरी से निकल देंगे, कम वेतन पर 12-12 घण्टे काम कराएंगे, कोई ओवर टाइम का प्रावधान नहीं रह जायेगा और मजदूरो और कर्मचारियों की स्थिति बंधुवा मजदूर से भी बदतर हो जाएगा। इसलिए उन्होंने सभी लोगो से निवेदन किया कि अपने-अपने घर से अपनी मांगों के समर्थन की तख्ती बैनर बनाकर उसके द्वारा सरकार के इस फैसले का पुरजोर विरोध करे। इकाई के सैकड़ो साथियो ने निम्न तख्तियों के साथ अपने-अपने घरों, छतों, बालकनियों और दरवाजो पर खड़ा होकर श्रम कानूनों के रद्द करने के सरकारी फरमान के खिलाफ आवाज़ बुलंद की। मांगों के समर्थन की तख्ती बैनर में काम के घंटे 8 रहेगे 8 ही घंटे काम करेंगे, COVID-19 के बहाने मजदूरो को गुलाम न बनाओ, श्रम कानूनो को रद्द करने का फैसला वापस लो। मनमानी की हद करना श्रम कानूनो को रद्द करना, नही चलेगा नही चलेगा, मजदूर भी इंसान है हमे जानवर समझना बंद करो, श्रम कानूनो मे संशोधन देश की मेहनतकश जनता के साथ धोखा है, श्रम कानूनो को रद्द होने का मतलब हमारे बच्चो की रोटी को छिंनना है, मजदूरो को गुलाम बनाने की साज़िश मत करो, 22 मई 2020 विरोध दिवस श्रम कानूनो को खत्म करने के खिलाफ है, दुनिया के मझदूर एक हो मजदूर एकता जिन्दावाद, श्रम कानूनो को रद्द करके मजदूरो को भेड़िये के हवाले मत करो आदि था।