ग़ाज़ीपुर- उम्मीद की एक किरण है ‘आशा’ कार्यकर्ताऐं

– रखती हैं सारी जानकारियाँ, आपातकालीन स्थिति में भी निभाती हैं अहम भूमिका
– महिला होते हुए भी गीता सिंह ने पुरुषों को नसबंदी के लिए किया प्रेरित

प्रखर ब्यूरो ग़ाज़ीपुर। ‘आशा’ एक ऐसा शब्द है जिसे सुनने के बाद हर किसी को एक उम्मीद की किरण नजर आने लगती है। जी हां हम बात कर रहे हैं स्वास्थ्य विभाग के द्वारा चलाई जा रही योजनाओं को गांव के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने वाली आशा कार्यकर्ता की। आशा गाँव में प्रत्येक परिवार की मुखिया की तरह गर्भवती महिला को टीकाकरण, बच्चों को टीकाकरण के साथ ही प्रसव के वक्त भी स्वास्थ्य केंद्र तक प्रसूता को पहुंचाने का काम करती हैं। वहीं बढ़ती हुई जनसंख्या को सरकार की ओर से चलाई जा रहे परिवार नियोजन कार्यक्रम, जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा व परिवार नियोजन के साधन उपलब्ध कराने और नसबंदी के लिए प्रेरित करने का भी कार्य करती हैं। इस तरह की जिम्मेदारी उठाने वाली जनपद में आशा कार्यकर्ताओं की संख्या 3,384 है।
स्वास्थ्य विभाग के द्वारा संचालित किए जाने वाले योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने वाली ऐसी ही एक आशा कार्यकर्ता गीता सिंह है, जो रेवतीपुर ब्लाक के अंतर्गत अवती गांव की रहने वाली हैं। रेवतीपुर ब्लाक की बीपीएम बबीता सिंह बताती हैं कि नवंबर माह में रेवतीपुर ब्लॉक में जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा के तहत नसबंदी का कैंप लगाया गया था, जिसमें 16 पुरुषों का नसबंदी किया गया था। इनमें से 6 पुरुषों की नसबंदी कराने का योगदान गीता सिंह का अकेले था, जबकि ब्लॉक में 200 आशाएं हैं। इन्होंने लाभार्थियों को समझाकर पुरुष नसबंदी के लिए तैयार किया। जिसके लिए उन्हें मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने 29 फरवरी को सम्मानित भी किया था। आशा कार्यकर्ता गीता सिंह ने बताया कि पुरुष नसबंदी के लिए लोगों को बताना पड़ा कि इसमें कोई चीरा या टांका नहीं लगाया जाता और ना ही कोई परेशानी होती है। तब जाकर यह लोग नसबंदी के लिए तैयार हुए थे। इसके अतिरिक्त कोविड-19 के दौरान भी कार्य रही हैं। उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में उनके इलाके में करीब 25 से 30 प्रवासी मजदूर आए हुए हैं जिनकी निगरानी करना उनकी जिम्मेदारी है। इसके लिए प्रतिदिन वह स्वयं 10 से 15 लोगों के घर जाकर उनका वीडियो बनाकर विभाग को भेजती हैं। साथ ही उनके बारे में आसपास के लोगों से भी पता करती हैं। गीता सिंह अपने कर्तव्य को लेकर हमेशा तत्पर रहती हैं। यह अपने इलाके की पूरा रिकॉर्ड अपनी डायरी में तैयार रखती हैं जिससे उन्हें कब और किस महिला को टीकाकरण कराना है। कब गर्भवती को प्रसव के लिए एएनएम केंद्र या स्वास्थ स्वास्थ्य केंद्र तक ले जाना है। आशा की डायरी में सब कुछ दर्ज होता है। अभी लॉकडाउन के दौरान शुरू हुए विशेष टीकाकरण अभियान में भी गर्भवती माताओं और बच्चों को टीकाकरण केंद्र तक पहुंचाने में अपनी भूमिका निभा रही हैं। गाजीपुर जनपद के ब्लॉक में कार्यरत आशाओं की बात करें तो स्वास्थ्य केंद्र सैदपुर में 192, देवकली में 273, मिर्जापुर में 246, मनिहारी में 201, सुभाखरपुर में 194, जमानिया में 217, जखनिया में 262, भदौरा में 232, रेवतीपुर में 200, बिरनो में 159, करंडा में 142, मोहम्दाबाद में 251, बाराचावर में 191, कासिमाबाद में 248, गोडउर में 180, मरदह में 196 आशाएं कार्यरत है। इन्हीं आशाओं के माध्यम से सरकार की स्वास्थ्य संबंधी योजनाएं जन-जन तक पहुंच रही हैं।