ग़ाज़ीपुर- पांचवीं पुण्यतिथि पर याद किये गए कर्मचारी नेता स्व. डी.एन. सिंह

प्रखर ब्यूरो गाजीपुर। “मै बुझ कर नहीं थक कर सोता हूं, मुझे सपने नहीं आते क्योंकि मैं उथला हूं पर मेरी नींद गहरी है। मैं ऊर्जा हूं कल की परिभाषित लक्ष्य प्राप्ति की आशा संजोए, मैं वर्तमान में जीता हूं। यह पंक्तियां स्व. डी.एन. सिंह के लिए प्रेरणा स्रोत थी, जो कर्मचारियों को सदैव प्रेरित करती रहेंगी। यह बातें राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के संरक्षक अरविंद नाथ राय ने कही। उन्होंने बताया कि कर्मचारी नेता रहे स्व.डीएन सिंह एक व्यक्ति नहीं बल्कि व्यक्तित्व थे। राज्य कर्मचारियों के लिए वे हमेशा प्रेरणा के स्रोत रहेंगे। वे अमर है।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के जिलाध्यक्ष, संगठन मंत्री और सिंचाई संघ के प्रदेश चेयरमैन रहे स्व. डी.एन. सिंह की पांचवीं पुण्यतिथि पर शनिवार को श्रमिक उत्थान समिति के तत्वावधान में फुल्लनपुर स्थित आवास पर आयोजित कार्यक्रम में उनके तैल चित्र पर पुष्प चढ़ाकर शुभारंभ किया गया। पुण्यतिथि के अवसर पर सोशल डिस्टेंसिंग का भी ध्यान रखा गया। योग गुरु शिवशंकर राय ने उनके व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला और कहा कि स्व. डी.एन. सिंह जैसा कर्मचारी नेता नही मिलेगा। वह अपने व्यक्तित्व के बल पर कर्मचारियों को बिना लड़ाई के अनगिनत उपलब्धियां दिलाई हैं। इस मौके पर श्रीकांत राय ने कहा कि नलकूप विभाग से जुड़े हजारों कर्मचारियों को राज्य कर्मचारियों के समान वेतन भत्ते दिलाने में डी.एन. सिंह ने जो सशक्त आंदोलन किया था वह आज भी कर्मचारी संगठनों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। ऐसे में कर्मचारियों का संगठित होना ही उनको सच्ची श्रद्धांजलि होगी। हम सभी को डीएन सिंह के बताए रास्ते पर चलते हुए संगठन की मजबूती बनाए रखना होगा। माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष नारायण उपाध्याय ने कहा कि हर कर्मचारी को डी.एन. सिंह के प्रेरक कार्यो से सबक लेते हुए अपने हितों के लिए संघर्ष करते रहना चाहिए। इसके लिए एकजुटता का होना भी आवश्यक है। परिषद मण्डल अध्यक्ष डी.एस. राय ने उन्हें संगठन का भीष्म पितामह बताते हुए कहा कि बड़े भाई में सदैव धर्म और कर्म, प्रेम की झलक दिखाई देती थी। जो भी साथी इनके मार्ग पर चलते थे। उनका यही संदेश था कि मै छोड़े और जी धारण करे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे श्रमिक उत्थान समिति के अध्यक्ष चौधरी दिनेश चंद्र राय ने कहा कि डी.एन. सिंह आजीवन कर्मचारियों की लड़ाई लड़ते रहे। उन्होंने अपने सहकर्मियों की कीमत पर कभी समझौता नहीं किया। यहां तक कि जिले में कई गुटों में बंटे हुए कर्मचारी संगठनों को एक मंच पर लाकर खड़ा किया। इस मौके पर नमोनारायण राय, गुप्तेश्वर तिवारी, अभय सिंह, रविन्द्र नाथ तिवारी, संतोष कुमार सिंह, राकेश कुमार पाण्डेय, प्रकाश चन्द्र राय, बालेन्द्र त्रिपाठी, अन्तु गुप्ता, गायत्री सिंह, राजवीर सिंह, कृष्ण कुमार मिश्र, राजीव कुमार सिंह आदि मौजूद रहे।