ग़ाज़ीपुर- ठंड से प्रभावित बच्चों की संख्या में हो रहा इजाफा, रखें विशेष ख्याल

प्रखर ब्यूरो ग़ाज़ीपुर। जनपद में इन दिनों ठंड का कहर जारी है। प्रतिदिन पारा 05 से 10 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच रहा है। ऐसे में ठंड, बच्चों को अपना शिकार बना रही है, जिसके चलते ठण्ड से लगने वाली बीमारियों (कोल्ड अटैक) का असर बच्चों में ज्यादा देखने को मिल रहा है। जनपद गाजीपुर में इससे पीड़ित बच्चों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा हैं। जिला अस्पताल में ठण्ड से लगने वाली बीमारियों से पीड़ित 25 से 30 बच्चे प्रतिदिन पहुँच रहे है। इसलिए बच्चों का विशेष ख्याल रखना बेहद जरूरी है।
जिला अस्पताल में तैनात बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. तनवीर अफरोज ने बताया कि प्रतिदिन बच्चों की संख्या 100 के ऊपर हो जाती है, लेकिन ठंड बढ़ने के बाद बुखार, सर्दी, खांसी, कोल्ड डायरिया, निमोनिया के 25-30 बच्चे पहुंच रहे हैं, जिनका निःशुल्क इलाज जिला अस्पताल में किया जा रहा है। वहीं उपचार के बाद दवा देकर वापस घर भेज दिया जा रहा है, तो कुछ बच्चों की गंभीर स्थिति होने पर जिला अस्पताल में भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बच्चों के ठंड से बीमार होने पर बच्चे के सीने में दर्द, सांस लेने में दिक्कत, मल में बदबू, दूध पिलाने के बाद भी नहीं पचना, बच्चे का लगातार रोना, पेट में दर्द रहना, आंखे लाल होना इस तरह के लक्षण दिखाई दे रहे हों तो समझ जाएं कि उसको ठण्ड लग गयी है और उसे तत्काल इलाज के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर ले जाएं और चिकित्सक के परामर्श पर उसे उचित दवा दें। डॉ. तनवीर अफ़रोज ने बताया कि इस ठंड के मौसम में बच्चों को ठंड से बचाने के लिए घर से बाहर न निकलने दें। गर्म कपड़े में लपेटकर रखें, हाथ-पैरों में दस्ताने और मोजे व सिर पर टोपी पहनकर रखें, जितना हो सके बच्चे के शरीर को ढककर रखें, बच्चे के साथ ही मां भी गर्म कपड़े का प्रयोग करें, बच्चे को पिलाने वाले दूध को गुनगुना कर दूध पिलाएँ, जन्म से छह माह तक बच्चों में सिर्फ स्तनपान जारी रखें। मां के स्पर्श में रहने से बच्चा ठंड के मौसम में सुरक्षित और स्वस्थ रहता है साथ ही उसको गर्माहट भी मिलती रहती है। इसलिए विशेषज्ञ और चिकित्सक भी ठंड के मौसम में कंगारू मदर केयर की सलाह देते हैं। घर को गर्म रखने की कोशिश करें। तापमान में ज्यादा गिरावट आए तो बिजली से चलने वाले उपकरणों का इस्तेमाल कर सकते हैं। बच्चे के पास जलती हुयी लकड़ी या अन्य कोई ऐसी चीज न जलाएं क्योंकि इसका धुआं उसे बीमार कर सकता है। बच्चों की त्वचा संवेदनशील होती है और विभिन्न वायरस भी त्वचा पर पनपने का डर रहता है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार मॉइश्चराइजर क्रीम का इस्तेमाल किया जा सकता है। बच्चों को रोज न नहलाएँ, गरम पानी युक्त गीले कपड़े से उसके शरीर को पोंछें। हल्की धूप में बच्चे को लिटाकर सरसों या किसी अन्य तेल से मालिश की जाए तो बच्चा स्वस्थ रहता है।