ग़ाज़ीपुर- एचआईवी पॉजिटिव मरीजों को मिल रही नि:शुल्क काउंसलिंग और दवा

– संदेशों के जरिये लोगों को किया जा रहा जागरूक

प्रखर ब्यूरो ग़ाज़ीपुर। ‘असुरक्षित यौन संबंध से बचें, कंडोम का प्रयोग करें। संक्रमित खून और संक्रमित सुइयों का प्रयोग न करें। गर्भवती महिलाओं की एचआईवी जांच कराएं। जानकारी ही बचाव है’। कुछ इसी तरह के संदेश जिला अस्पताल में संचालित एआरटी सेंटर के द्वारा एचआईवी पॉजिटिव मरीजों तक पहुंचाए जा रहे हैं। इलाज के दौरान उन्हें निःशुल्क काउंसलिंग (परामर्श) और दवाएं भी प्रदान की जा रही हैं।
नोडल अधिकारी एवं एसीएमओ डॉ. के.के. वर्मा ने बताया कि सरकारी व निजी अस्पतालों, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और सार्वजनिक स्थानों पर एचआईवी/एड्स के संदेशों को जन समुदाय के लिए चस्पा किया गया है, ताकि प्रत्येक व्यक्ति रोज मर्रा की ज़िंदगी में इन संदेशों को पढ़कर जागरूक हो सके। इस बीमारी की रोकथाम के लिए सरकार भी लगातार जागरूकता अभियान चला रही है। बावजूद इसके एड्स पीड़ितों की लगातार बढ़ती संख्या हैरान करने वाली है। जिला एआरटी सेंटर के आंकड़ों के अनुसार पुरुषों से ज्यादा महिलाएं इस बीमारी की चपेट में हैं। पिछले दो सालों में पीड़ित महिलाओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। एआरटी सेंटर के प्रभारी डॉ. के.के. भाष्कर ने बताया कि इस रोग का इलाज संभव नहीं है लेकिन दवाओं और उचित परामर्श के जरिए मरीज स्वस्थ जीवन जी सकता है। एचआईवी/एड्स पॉजीटिव गर्भवती महिला से उसके बच्चे को, असुरक्षित यौन संबंध या संक्रमित रक्त या संक्रमित सुई के प्रयोग से उसके जीवनसाथी को भी हो सकता है। एचआईवी पॉजीटिव होने के छह महीने से दस साल के बीच में कभी भी एड्स हो सकता है। उन्होने बताया कि एक एचआइवी पॉजीटिव को इस बीमारी का पता तब तक नहीं चलता, जब तक कि इसके लक्षण प्रदर्शित नहीं होते हैं। उन्होंने इस बीमारी के लक्षणों के बारे बताते हुए कहा कि लगातार कई हफ्तों तक बुखार रहना, कई हफ्ते खांसी आना, अचानक वजन का घटना, भूख न लगना, बार-बार दस्त लगना, गले या बगल में सूजन भरी गिल्टियां हो जाना, त्वचा पर दर्द भरे दाने और खुजली अधिक होना, सोते समय पसीना आना आदि इसके मुख्य लक्षण हैं। जिला अस्पताल में 2011 से एचआईवी पॉजिटिव मरीजों के लिए एआरटी सेंटर संचालित है। वर्तमान में करीब 1500 से अधिक मरीजों का एआरटी सेंटर के माध्यम से नि:शुल्क उपचार किया जा रहा है। एचआईवी/एड्स के मरीजों की संख्या दूसरे व्यक्ति से असुरक्षित यौन संबंध बनाने से बढ़ती है। ऐसे में सुरक्षित यौन संबंध के साथ सभी व्यक्तियों की जांच बेहद जरूरी है। एचआईवी/एड्स पॉज़िटिव मरीजों में ज़्यादातर मरीजों को क्षय रोग से पीड़ित होने की संभावना रहती है। ऐसे में उनका भी इलाज एआरटी सेंटर में निःशुल्क किया जाता है।