ग़ाज़ीपुर- अद्भुत व प्राचीन है उसिया गांव स्थित महादेवा शिवमंदिर

प्रखर ब्यूरो सेवराई/ग़ाज़ीपुर। उसिया गांव स्थित महादेवा शिवमंदिर की मान्यता है कि दिलदारनगर में राजा नल एवं रानी दमयंती की राजधानी थी। उस ज़माने में राजा नल एवं रानी दमयंती यही रहकर अपना राजपाठ देखा करते थे। दिलदारनगर से उसिया के बीच कमलदह नाम से एक सरोवर था। उसिया गांव के पास राजा नल एवं रानी दमयंती ने कसौटी धातु से जगदीश्वर भगवन शिव के विशाल शिवलिंग की स्थापना किया। जो पूर्वांचल में सबसे बड़ा शिवलिंग था। उसिया गांव के पूर्व में स्थापित इस शिव मंदिर में राजा नल एवं रानी दमयंती प्रतिदिन कमलदह सरोवर से नाव द्वारा आते थे और दर्शन पूजन करते थे। बताया जाता है कि इस गांव में सकरवार वंश के लोग जब फ़तेहपुर सिकरी छोड़ के आये तो जगदीश्वर भगवन शिव के विशाल मंदिर को देख यही बस गये। सकरवार वंश के लोगो ने इस मंदिर में पूजा पाठ करना शुरू कर दिया। जब भारत में मुगलिया शासन हुवा तो उस दौरान औरंगजेब शासक बना और धर्म परिवर्तन के लिए हिन्दुओ पर काफी दबाब डाला। इस दौरान कुछ सकरवार वंश के लोग हिन्दू धर्म छोड़ कर मुस्लिम धर्म को अपना लिया। बताया जाता हैं कि उसिया जगदीश्वर भगवान शिव के मंदिर के चारो तरफ मुस्लिम वर्ग का निवास है। लेकिन ये लोग भी आस्था के साथ पूजा पाठ एवं विभिन्न कार्यक्रमो में सहयोग प्रदान करते हैं। यह क्षेत्र हिंदू मुस्लिम एकता के लिए काफी विख्यात है। इसी के तहत महाशिवरात्री श्रावण जैसे बड़े पर्व में मुस्लिम समुदाय के लोग भी आने वाले श्रद्धालुओं को काफी सहयोग करते हैं। इस मंदिर के जीर्णशीर्ण व्यवस्था को देखते हुए पूर्व विधायक सिंहासन सिंह ने विधायक निधि से अपने कार्यकाल में धन देकर निर्माण एवं पुनः मरम्मत कराया। जबकि क्षेत्र के एक श्रद्धालु ने जगदीश्वर भगवान के लिंग पर चांदी से मुकुट के साथ मढाया। बताया जाता है कि जिस धातु से यह शिवलिंग निर्मित है उसका विश्व स्तर पर करोडो रुपया में मूल्य निर्धारित है। मंदिर के बगल स्थित कमलदह सरोवर देख रेख के अभाव में कचरा और गंदगी से पट गया है। मंदिर के पुजारी ने बताया कि सच्चे मन से आने वाले सभी भक्तों की मुराद भगवान शिव पूरा करते है। यहा श्रावण मास एवं महाशिव रात्री पर विशेष पूजा का अयोजन होता है और लोगो द्वारा पुरे महीने भजन कीर्तन एवं प्रसाद वितरण किया जाता हैं।