ग़ाज़ीपुर- वेलफेयर क्लब के तत्वाधान में अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस पर आधुनिक भारत में महिलाओं कि दशा और दिशा विषय पर गोष्ठी का हुआ आयोजन

प्रखर ब्यूरो ग़ाज़ीपुर। वेलफेयर क्लब की ओर से अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस पर आधुनिक भारत में महिलाओं कि दशा और दिशा विषय पर गोष्ठी का आयोजन ओजस एकेडमी नवाबगंज में किया गया। गोष्ठी का उद्घाटन क्लब अध्यक्ष डा. शरद कुमार वर्मा तथा मुख्य अतिथि स्वामी सहजानंद स्नात्कोत्तर महाविद्यालय के वाणिज्य प्रवक्ता डा. विजय कुमार ओझा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। अपने संबोधन में क्लब अध्यक्ष ने बताया कि प्राचीन काल से आज तक में महिलाओं के प्रति लोगो कि सोच बहुत बदल गयी है। बहु विवाह प्रथा, सती प्रथा, दहेज प्रथा, कन्या भ्रूण ह्त्या जैसे मामले उजागर होने कि बात आम होने लगी है। उभरती परिस्थितियों को देखते हुये लोगो और समाज सुधारको ने इस दिशा में काम करने कि ठानी है। उनकी मेहनत का ही नतीजा है कि महिलाओ कि बिगड़ती हुयी स्थिति पर काबू पाया गया। उसके बाद भारत सरकार ने भी इस दिशा में काम किया। सरकार ने पंचायती राज प्रणाली में 33% सीट महिलाओ के लिए आरक्षित कर आगे आकर समाज के भलाई करने के लिए उन्हें मजबूती दी है। मुख्य अतिथि डा. विजय कुमार ओझा ने अपने संबोधन में बताया कि प्राचीन काल में महिलाओ को देवी का दर्जा देने के बाद भी उनकी हालत राजा महाराजा के दासियो के सामान थी। सैद्धान्तिक रूप से भले ही महिला को ऊँचा स्थान दिया गया पर व्यवहारिकता में महिलाओ को सामाजिक स्तर पर काम करने कि मनाही थी। उन्होंने आह्वाहन किया कि नारी को सम्मान देना है तो इसकी पहल अपने घर से करे, क्यों बेटो के लिए सभी चीजो की आज़ादी होती है? क्यों बेटी को हर कदम पर प्रतिबंधित कर सिखाया जाता है कि कैसे चलना है, क्या पहनना है, कैसे बात करनी है, कैसे रहना है? यह सारे नियम कानून लड़कियों के लिए ही क्यों बनाया जाता है? परिवार में अपनों के ही तानो का शिकार बनने के बाद एक दिन उस बेटी के हाथ पीले कर उसे दूसरे घर विदा कर दिया जाता है। पति के घर जाने से पहले उसे समझाया जाता है कि अब वही तेरा घर है और जैसे वो चाहेंगे वैसे ही रहना। लड़की भी सोचती कि पहले मायके में सभी के मर्जी से चली और अब ससुराल वालो के हिसाब से चलना ही अपना धर्म है। ये कैसा नारी-सम्मान?
इस अवसर पर क्लब उपाध्यक्ष धीरेन्द्र त्रिपाठी, परीक्षा प्रभारी धर्मेन्द्र कुमार, एड. चन्द्रिका प्रसाद, मनीषा राजभर, आरती, आस्था सिंह कुशवाहा, प्रतीक्षा, महिमा गुप्त, धर्मेन्द्र जायसवाल, पल्लवी खरवार, डा. जितेन्द्र कुमार, अजय यादव, प्रमोद बिन्द, शिक्षा गुप्ता, शिवांगी वर्मा, फिजा परवीन, नेहा जयसवाल, सूर्य रेख मणि आदि उपस्थित रहे। गोष्ठी का संचालन क्लब पीआरओ अमन प्रजापति ने किया।