शिक्षा विभाग में हड़कंप, बीएसए वाराणसी ने चार शिक्षकों को कोर्ट के आदेश पर किया बर्खास्त

– जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी वाराणसी की बड़ी कार्यवाही

– फर्जी डिग्री पर काम कर रहे चार लोगों की सेवा समाप्त

प्रखर वाराणसी। वाराणसी शिक्षा विभाग में उस समय खलबली मच गई जब वाराणसी बीएसए राकेश सिंह ने 4 शिक्षकों को सेवानिवृत्त करने का आदेश दिया। साथ में एक को नोटिस जारी की गई है। बता दें कि इन लोगों की डिग्री फर्जी पाई गई है। जिसके बाद बीएसए वाराणसी ने आदेश दिया। बताया जा रहा है कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार डॉ भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा के बीएड में फर्जी एवं टेम्पर्ड प्रमाण पत्र धारी बीएड उपाधि प्राप्त करने के आधार पर परिषदीय विद्यालयों में सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्ति हुई थी। जिसकी जांच पड़ताल में इनकी डिग्री फर्जी पाई गई। जिसके बाद इन्हें सेवानिवृत्त कर दिया गया है। बता दें कि इस फैसले के विभाग शिक्षा विभाग वाराणसी में बड़ी हलचल मची हुई है। तमाम ऐसे संदिग्धों को चिन्हित किया जा रहा है और इनके खिलाफ आगे भी कार्रवाई की जाएगी। इस बाबत बीएसए वाराणसी राकेश सिंह का कहना है कि और लोग भी इस तरह के अध्यापक, अध्यापन का कार्य कर रहे हैं। जल्द ही इनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। जिसके बाद पूरे वाराणसी के प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों में खलबली मच गई है। बताते चलें कि बर्खास्त करने के बाद इनसे वेतन की रिकवरी भी की जाएगी, जिसके बाद से इन लोगों में खलबली मची हुई है। बता दें कि यह लोग सन 2010 में शिक्षक के पद पर नियुक्ति प्राप्त किये थे। जिसके बाद से अब तक ये लोग वेतन ले रहे थे। इस वेतन की रिकवरी शिक्षा विभाग जल्द करेगा। बर्खास्त किए गए लोगों में ममता सिंह प्राथमिक विद्यालय सिरिहिरा विकासखंड सेवापुरी, किरण लता सिंह प्राथमिक विद्यालय बनपुरवा विकासखंड काशी विद्यापीठ, रेनू सिंह प्राथमिक विद्यालय राखी आराजी लाइन विकासखंड व सरिता वर्मा प्राथमिक विद्यालय दल्लूपुर बड़ागांव विकासखंड में कार्यरत थी। जिसके बाद इन लोगों की जांच पड़ताल में फर्जी डिग्री पाये जाने के बाद इन्हें सेवा मुक्त कर दिया गया है। जबकि एक अध्यापिका अर्चना पांडे जो प्राथमिक विद्यालय कल्लीपुर आराजी लाइन में तैनात थी, इन्हें नोटिस जारी की गई है। बता दें कि इन 4 लोगों से करीब ₹50 लाख की रिकवरी की जाएगी । यह लोग पिछले 10 सालों से इन प्राथमिक विद्यालय में पर फर्जी डिग्री के आधार पर कार्य कर रहे थे और वेतन ले रहे थे। बता दें कि इस मामले में सुनील कुमार बनाम डॉक्टर भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की विवेचना के निर्देश पर एसआईटी द्वारा जांच की जा रही थी, इस मामले में फर्जी एवं टेंपल प्रमाण पत्र धारी इन शिक्षकों की सेवा समाप्त करने का आदेश दिया गया । जिसके बाद यह कार्रवाई की गई।