2022 में प्रियंका हो सकती हैं कांग्रेस का मुख्यमंत्री चेहरा, सपा बसपा ने कांग्रेस से बढ़ाई दूरी!

– सीएए के विरोध में सबसे मुखर प्रियंका पर दांव लगा सकती है कांग्रेस

– प्रियंका की सक्रियता से सकते में सपा बसपा

प्रखर वाराणसी। नागरिकता संशोधन बिल के विरोध में तमाम मुस्लिम संगठनों के साथ कांग्रेस की महासचिव और उत्तर प्रदेश प्रभारी प्रियंका गांधी सबसे ज्यादा मुखर हैं । उन्होंने तमाम मंचों के माध्यम से इस कानून का लगातार विरोध किया है । प्रियंका की उत्तर प्रदेश में सक्रियता को देखते हुए बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी ने फिलहाल चुप्पी साध रखी है। रणनीति के तहत दोनों कांग्रेस की योजनाओं से लगातार दूरी बनाए हुए हैं । बता दें कि सोनिया गांधी द्वारा दिल्ली में सभी विपक्षी पार्टियों को देश के वर्तमान हालात पर चर्चा करने के लिए दिल्ली में बुलाया गया था । लेकिन इस मीटिंग से ममता बनर्जी के अलावा अखिलेश यादव और मायावती ने भी दूरी बना लिया था। बता दें कि तृणमूल,समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी तीनों के राजनीतिक समीकरण में मुसलमान जरूरी है । लिहाजा नागरिकता कानून पर कांग्रेस के मुखर विरोध में उन्हें लगता है कहीं मुसलमान संगठित होकर कांग्रेस के साथ ना चला जाए। लिहाजा इन तीनों ने कांग्रेस के साथ समानांतर दूनी बनाते हुए अपने अपने तरीके से नागरिकता कानून का विरोध शुरू किया है। कांग्रेस सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा 2022 में उत्त प्रदेश से पार्टी के मुख्यमंत्री पद का चेहरा हो सकती हैं। कांग्रेस के नेता इस रणनीति को आधार बनाकर राज्य में आर-पार के राजनीतिक अभियानों को मंजूरी देने की मंशा पाल चुके हैं। जिसकी साफ झलक प्रियंका के दौरों में दिखाई दे रही है माना जा रहा है कि अब कांग्रेसमें नई रणनीति और नए रणनीतिकारों का समय आ गया है लिहाजा अब कांग्रेस का चेहरा साफ बदलता दिखाई दे रहा है। लिहाजा प्रियंका गांधी ने भी प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के लिए पूरी जान लगा दी है। वह लगातार राज्य के दौरे पर हैं।  बता दें कि 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान उत्तर प्रदेश (पश्चिम) के तत्कालीन प्रभारी और कांग्रेस महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ प्रियंका वाड्रा को पूर्वांचल की जिम्मेदारी सौंपी गयी थी। प्रियंका ने अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाते हुए उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के काया कल्प का बीड़ा उठाया है। बता दें कि प्रियंका वाड्रा के तेवर और प्रयासों से उत्तर प्रदेश के कांग्रेसियों में आशा की एक नई किरण दिखाई दे रही है।