बीएचयू में प्लास्टिक से बन रहा डीजल, आईआईटी की अनूठी पहल

-इस डीजल से खुद का ऑटो भी चलाने की है योजना

प्रखर वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय स्थित बीएचयू आईआईटी संभवत भारत का पहला ऐसा संस्थान बन गया है । जहां प्लास्टिक के कचरे से डीजल बनाया जा रहा है और अब आईआईटी इस डीजल से बीएचयू परिसर में फ्री ऑटो सेवा देने का विचार कर रहा है। आईआईटी के कैमिकल डेवलपमेंट विभाग के प्रोफेसर पीके मिश्र के अनुसार हम एक से डेढ़ महीने के अंदर एक ऑटो रिक्शा चलाना शुरू कर देंगे, जिससे हम लोगों को दिखा सकते हैं कि कचरे से एक यूज़फुल प्रोडक्ट्स बन रहा है। प्रदूषण की समस्या का हम एक उपयोगी समाधान दे रहे हैं। बतादें कि
प्लास्टिक के अभिशाप से बचने के लिए आईआईटी बीएचयू और रिन्युओशन संस्थान ने इस समस्या का हल तलाशने का दावा किया है। बीएचयू आईआईटी की लैब की ये मशीन इस वक्त की सबसे बड़ी समस्या प्लास्टिक का हल है। बीएचयू आईआईटी के हॉस्टल के कूड़े से प्लास्टिक छांटकर उसे लैब तक लाया जा रहा है और विशेष प्रक्रिया के माध्यम से प्लास्टिक से डीजल बनाया जा रहा है। सबसे पहली प्रक्रिया में प्लास्टिक को मशीन में डालकर छोटे-छोटे टुकड़ों में बांट लिया जाता है। फिर दूसरी मशीन में इन टुकड़ों को डालते हैं और प्लास्टिक के ये टुकड़े विशेष प्रक्रिया द्वारा डीजल का रूप लेते हैं। ये प्रयोग बीएचयू आईआईटी और रिन्युओशन संस्था के सहयोग से किया जा रहा है। बता दें कि यह बीएचयू आईआईटी का यह प्रयोग सफल रहा तो बहुत बड़ा अविष्कार साबित हो सकता है । क्योंकि वर्तमान में भारत ही नहीं समूचा विश्व प्लास्टिक के कचरे से परेशान दिखाई दे रहा है, और इसके निस्तारण के लिए लगातार योजनाएं बन रही हैं। लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की जा सकी है। बीएचयू आईआईटी का यह प्रयोग मानवता के लिए बहुत ही श्रेय कर साबित हो सकता है।