बेहमई कांड पर फिर टला फैसला  24 को फिर सुनवाई

– 1981 में फूलन देवी और उसके साथियों ने 20 लोगों उतारा था मौत के घाट
प्रखर लखनऊ। देश के सबसे चर्चित हत्याकांडों में से एक उत्तर प्रदेश का बेहमई हत्याकांड भी रहा है। बता दें कि इस मामले में लगभग चार दशक बीतने के बाद एक बार फिर फैसले की घड़ी नजदीक दिखाई दे रही है । लेकिन टेक्निकल कारणों से लगातार टलती जा रही है। बेहमई कांड की अगली सुनवाई अब 24 जनवरी को होगी। निर्णय के स्तर पर आकर न्यायालय को मूल केस डायरी पत्रावली में नहीं मिली। इसलिए कोर्ट ने इस केस के फैसले को 6 दिन के लिए और टाल दिया है और न्यायालय ने इसको तलाशने के निर्देश भी जारी कर दिए हैं। इस मामले में लिपिक राजेंद्र प्रसाद को भी नोटिस जारी किया गया है।
बता दें कि 14 फरवरी 1981 को डाकू फूलन देवी और उसके गिरोह ने बेहमई गांव में धावा बोलकर 20 लोगों की हत्या कर दी थी। कई लोग गोली लगने से घायल हो गए थे। बेहमई गांव निवासी राजाराम सिंह ने फूलन देवी समेत 35-36 डकैतों के खिलाफ थाना सिकंदरा में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके बाद मामला देशभर में चर्चित रहा था। मुकदमे की सुनवाई के दौरान ही फूलनदेवी समेत कई डकैतों की मौत हो चुकी है। वर्ष 2012 में डकैत फूलन समेत भीखा, पोसा, विश्नाथ, श्यामबाबू और राम सिंह पर आरोप तय किए गए थे। मामले की सुनवाई सुधीर कुमार विशेष न्यायाधीश दस्यु प्रभावित क्षेत्र (एंटी डकैती) की कोर्ट में चल रही है। बता दें कि इस हत्याकांड के कई आरोपियों की मौत भी हो चुकी है जिसमें प्रमुख आरोपी दस्यु सुंदरी फूलन देवी की नई दिल्ली में हत्या हो चुकी है। जालौन के कोटा कुठौंद के रामऔतार, गुलौली कालपी के मुस्तकीम, बिरही कालपी के लल्लू बघेल व बलवान, कालपी के लल्लू यादव, कोंच के रामशंकर, डकोर कालपी के जग्गन उर्फ जागेश्वर, महदेवा कालपी के बलराम, टिकरी के मोती, चुर्खी के वृंदावन, कदौली के राम प्रकाश, गौहानी सिकंदरा के रामपाल, मेतीपुर कुठौद के प्रेम, धरिया मंगलपुर के नंदा उर्फ माया मल्लाह की मौत हो चुकी है। इतने साल बीतने के बाद अब इस मामले में न्याय होना देश की न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है।