प्रेमचंद के गांव में सुभाष चन्द्र बोस का पहला मंदिर स्थापित

– दलित बच्ची बनी पहली पुजारी
 धर्माचार्यों ने विधि-विधान से की स्थापना
प्रखर वाराणसी। देश के मशहूर कहानीकार प्रेमचंद के गांव लमही में स्वतंत्रता सेनानी और आजाद हिंद फौज के संस्थापक
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की 123 वीं जयंती पर गुरुवार को उनका पहला मंदिर स्थापित किया गया। मंदिर की स्थापना विशाल भारत संस्थान के अध्यक्ष डा.राजीव श्रीवास्तव ने करायी है। मंदिर के स्थापना के समय राष्ट्रीय मुस्लिम मंच के इन्द्रेश कुमार भी उपस्थित रहे। अपने तरह के इस अनोखे मंदिर का उद्देश्य नेता जी के संदेश को सभी तक पहुंचाना है। मंदिर की जाति व धर्म का भेद नहीं होगा। पहली महिला पुजारी की जिम्मेदारी एक दलित बच्ची को सौपी गयी है। बतादें कि मंदिर का नाम सुभाष मंदिर रखा गया है। आयोजकों के अनुसार सुभाष भवन व सुभाष मंदिर को सुभाष तीर्थ के रुप में स्थापित किया जायेगा। मंदिर स्थापना का उद्देश्य लोगों में देशभक्ति की सीख देनी है। प्रतिदिन सुबह भारत माता की प्रार्थना के साथ सुबह सात बजे मंदिर का पट खोला जायेगा। इसके बाद शाम सात बजे आरती और आजाद हिन्द सरकार के राष्ट्रगान का पाठ करके मंदिर का पट बंद होगा। मंदिर में ग्रेनाइट से बनी सुभाष चन्द्र बोस की ६ फीट की मूर्ति लगायी गयी है। मंदिर में गर्भवती महिलाओं के दर्शन की विशेष व्यवस्था की गयी है ताकि उनका पुत्र व पुत्री देशभक्त पैदा हो। मंदिर में सुभाष का अभिवादन, चरण स्पर्श दंडवत के अतिरिक्त जय हिन्द से भी किया जायेगा। मंदिर में ही सुभाष चन्द्र बोस के विचारों के अनुरुप सभी धर्म व जाति के लोगों को सुभाष भवन में एकता का प्रशिक्षण भी मिलेगा।