दूसरा शाहीन बाग बनने की ओर उत्तर प्रदेश का देवबंद,  महिलाओं ने शुरू किया आंदोलन

प्रखर लखनऊ /देवबंद। शाहीन बाग का मामला दिनोंदिन अपना अलग-अलग रूप लेता जा रहा है। शाहीन बाग में लगातार महिला पुरुष नागरिकता संशोधन कानून को लेकर धरना प्रदर्शन पर बैठे हुए हैं। वहां पर यह सिलसिला बीते कई हफ्तों से जारी है। बता दें कि शाहिनबाग को लेकर सियासत आए दिन होती रहती है। साथ ही इसी बीच दिल्ली में विधानसभा चुनाव भी होने हैं । जिसको देखते हुए पूरे दिल्ली में चाक-चौबंद व्यवस्था कर दी गई है। अब नए मामले के अनुसार लखनऊ, प्रयागराज व वाराणसी के बाद उत्तर प्रदेश के देवबंद में भी नागरिकता संशोधन कानून को लेकर महिलाओं का एक समूह सरकार के खिलाफ होता नजर आ रहा है। बता दें कि उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में देवबंद इलाके का दारुल उलूम जो कि इस्लामिक मदरसों के लिए प्रसिद्ध है। जिसे काफी संवेदनशील माना जाता है। यहां पर भी महिलाओं ने नागरिकता कानून के खिलाफ एकजुटता दिखाना शुरू कर दिया है, लेकिन जिस प्रकार अन्य जगहों पर नागरिकता कानून को लेकर प्रदर्शन हो रहे हैं, यहां पर अभी तक शांति बरकरार है । बता दें कि सोमवार 27 जनवरी को मुत्ताहिदा खवातीन समिति के नेतृत्व में महिलाओं का एक समूह ईदगाह मैदान में जमा हुआ और सीएए व एनआरसी के खिलाफ अनिश्चितकालीन प्रदर्शन करने का ऐलान भी किया। वही एक स्थानीय नागरिक ने यह दावा भी किया है कि प्रदर्शन के आरंभ में महिलाओं की संख्या कम थी, लेकिन कुछ ही घंटों में यह संख्या बढ़ती चली गई। अब बड़ा सवाल यह है कि उत्तर प्रदेश सरकार इस पर किस प्रकार का एक्शन लेती है, यह देखने वाली बात होगी। वही मुत्ताहिदा खवातीन समिति की सलमा अहसान ने बताया कि महिलाओं की तकलीफों को दूर करने के उद्देश्य से कुछ ही साल पहले समिति को बनाया गया है। लेकिन अब हम सीएए के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। उसने दावा किया है कि हमारे इस मंच को किसी भी राजनीतिक दल के साथ साझा नहीं किया जाएगा , लेकिन अलग से हमारा साथ देते हैं तो उनका स्वागत है।  उन्होंने आगे कहा कि यह आंदोलन सिर्फ मुस्लिमों तक तक सीमित नहीं है, हमने सभी धर्मों की महिलाओं से अपील की है कि वह हमारा इस आंदोलन में साथ दें सिर्फ महिलाएं ही नहीं बल्कि स्कूल जाने वाली लड़कियां भी इस प्रदर्शन में शामिल होने के लिए समय निकाल सकती हैं। वही दसवीं कक्षा की एक छात्रा जुहा हुसैन का कहना है कि लड़ाई हमारे इंसाफ के लिए है और इसलिए मुझे पढ़ाई और प्रदर्शन में संतुलन बनाकर यहां आना ही होगा, ताकि दोनों जगहों पर अपनी मौजूदगी को मैं बखूबी दर्ज करा सकूं । अब देखना यह है कि देवबंद में शुरू हो रहे, इस आंदोलन को सरकार किस प्रकार रोक पाती है कि देवबंद में दूसरा शाहीन बाग बनता है।