वाराणसी में बर्ड फ्लू की आहट !

पिछले दिनों मोहनसराय में मृत मिले थे कई कौए, जिसमे एक पॉजीटिव

प्रखर वाराणसी। पिछले दिनों वाराणसी के मोहनसराय क्षेत्र में मृत पाये गये कौवों में से एक कौए में बर्ड फ्लू के लक्षण मिलने की पुष्टि हुई हैं। जिसके बाद प्रशासन अलर्ट में आ गया है। इसके अलावा मुर्गी फर्मो और पोल्ट्री फॉर्म संचालकों को इस बारे में सजग रहने और सावधानी बरतने के सुझाव दिया गया हैं। बतादे कि
बीते दस फरवरी को मोहनसराय क्षेत्र के जक्खिनी रोड पर कई कौवे मरे हुए पाये जाने की सूचना पर पशुपालन विभाग की टीम मौके पर पहुंची थी। जिसके बाद उसमें से मृत कौवों के सैंपल जांच के लिए भोपाल स्थित प्रयोगशाला भेजा गया। जहाँ पर लैब टेस्ट में एक कौए में बर्ड फ्लू (एच 5 एन 1) की रिपोर्ट पाजिटिव मिली। जबकि दो अन्य मृत कौवों में बर्ड फ्लू के लक्ष्य नहीं पाए गए। जिसको लेकर भोपाल की प्रयोगशाला ने इस बारे में मुख्यालय को सूचना भेजी। उसके बाद शासन ने बर्ड फ्लू से बचाव के लिए गाइड लाइन जारी के दी है। जिसके बाद सोमवार को सीडीओ मधुसूदन हुल्गी ने विकास भवन सभागार में बैठक कर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश भी दिये है। उनका कहना है कि मुर्गी फार्मों में बायोसिक्योरिटी का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराया जाय। साथ ही जनपद स्तरीय टास्क फोर्स के सदस्यों से समन्वय स्थापित कर जिले में बर्ड फ्लू विषयक किसी भी आपात स्थिति से निबटने को तैयार रहें। पोल्ट्री फार्मों और साइबेरियन जैसी प्रवासी पक्षियों का सर्विलांस कराएं। साथ ही जागरूकता के लिए कार्यालयों और ब्लाकों पर ‘क्या करें-क्या न करें’ की पूरी जानकारी प्रसारित कराया जाय।
श्री हुल्गी ने विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को कुक्कुट पालकों के संपर्क में रहने पर जोर दिया। ताकि कहीं भी पक्षियों की असामायिक मृत्यु की जानकारी मिलने पर तत्काल रोकथाम की कार्यवाही आरंभ की जा सके। वही मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. वीबी सिंह का कहना है कि बर्ड फ्लू का प्रकरण प्रकाश में आने के बाद मोहनसराय क्षेत्र के दस किमी परिधि में विभिन्न छोटे-बड़े मुर्गी पालकों के यहां से 137 सैंपल लेकर जांच के लिए बरेली स्थित प्रयोगशाला को भेजा गया है। उन्होंने आगे बताया कि साथ ही प्रवासी पक्षियों समेत मुर्गी पालकों की निगरानी हो रही है। यदि कहीं भी बड़ी संख्या में पक्षियों की मौत की सूचना मिले तो तत्काल पशु पालन विभाग या वन वभिाग अथवा तहसील प्रशासन को इसकी सूचना देनी चाहिए। स्वास्थ्य विभाग को भी अलर्ट मोड में रखा गया है। सर्दी खत्म होने और गर्मी के मौसम की शुरुआत में बर्ड फ्लू के केस पाये जाने की आशंका बन ही जाती है। इस बाबत डॉ. सिंह ने बताया कि गर्मी बढ़ने के साथ बर्ड फ्लू जैसे वायरस समाप्त हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि कौवे सैड़कों मील का सफर करने में सक्षम हैं और इसीलिए कौवों में बर्ड फ्लू का वाहक माना जाता है। इस वायरस की चपेट में आने पर श्वांस नली में संक्रमण हो सकता है। आमलोगों को इस वायरस के भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है। क्योंकि भारत में लोग कच्चा मांस नहीं खाते। वह मांस को अच्छी तरह पकाकर खाते हैं।