दिसंबर में खुदरा महंगाई साढ़े पांच साल में सबसे अधिक

– सब्जियों की कीमतों में जबरदस्त उछाल

-खुदरा महंगाई की दर 7.35 के साथ 2014 के पार

प्रखर दिल्ली । 2014 में जब मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार बनी थी तो उस समय महंगाई अपने चरम पर थी। खुदरा कीमतें आसमान पर थी लोगों के खाने पीने की चीजों के कीमतों में भी जबरदस्त उछाल था। लेकिन बीते 5 सालों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खाद्य पदार्थों की कीमतों को नियंत्रण में रखने का प्रयास किया जो लगभग सफल रहा। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल में मौसम ने अपना रंग दिखाया और मौजूदा समय में महंगाई का खुदरा स्तर 2014 के पार चला गया है । यानी खुदरा महंगाई 7% से ऊपर पहुंच चुकी है। बता दें कि केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने सोमवार को दिसंबर 2019 के लिए खुदरा महंगाई दर के आंकड़े जारी कर दिए हैं। ​बीते दिसंबर माह में खुदरा महंगाई दर रिकॉर्ड 7.35 फीसदी रही है। खाद्य पदार्थों व तेलों की कीमतों में इजाफा होने के बाद खुदरा महंगाई दर में इतनी तेजी आई है। इसके पहले नवंबर 2019 में खुदरा महंगाई दर 5.54 फीसदी रही थी। वहीं, पिछले साल इस अवधि में यह दर 2.19 फीसदी रही थी। भारतीय रिजर्व बैंक ने मध्यावधि के लिए खुदरा महंगाई दर का लक्ष्य 4 फीसदी रखा था। लेकिन खुदरा करें लगातार वृद्धि करती हुई बीते नवंबर माह में 40 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंचते हुए खुदरा महंगाई 5.54 फीसदी के स्तर पर पहुंची थी। बता दें कि खुदरा महंगाई में वृद्धि सब्जियों की मांगी कीमतों के कारण हुई है। दिसंबर 2019 के दौरान सब्जियों की कीमतों में 60.5 फीसदी का इजाफा देखने को मिला. नवंबर 2019 में इसमें 36 फीसदी इजाफा हुआ था। केंद्रीय सांख्यिकी सूचकांक के हिसाब से खुदरा महंगाई को इन सेक्टरों ने सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। जिनमें सबसे कम कपड़े व फुटवियर की महंगाई दर में रहा जहां मामूली इजाफा हुआ है । दिसंबर में महंगाई दर 1.50 फीसदी रही, जो कि नवंबर में 1.30 फीसदी पर थी। तो सबसे ज्यादा उछाल सब्जी के बाद दलहन में रहा जहां दिसंबर माह में दालों की महंगाई महीने-दर-महीने आधार पर 15.44 फीसदी बढ़ी है जबकि नवंबर में यह 13.94 फीसदी रही थी। अनाजों की महंगाई की बात करें तो यह भी महीने-दर-महीने आधार पर नवंबर की 3.71 फीसदी की तुलना में बढ़कर 4.36 फीसदी रही है। बता दें कि सब्जियों के भाव इस समय आसमान पर है। प्याज जहां अभी भी 80 से लेकर ₹100 किलो बिक रहा है तो वहीं लहसुन लगातार ₹200 पर टिका हुआ है।इसके अलावा अन्य सब्जियों के भी दाम सामान्यता दूसरे वर्षों की अपेक्षा बड़े हुए हैं । लिहाजा इस महंगाई के कारण सब्जियां गरीबों की थाली से दूर हो गई हैं।