विश्व हिंदू परिषद ने माघ मेला में राम मंदिर का स्वरूप किया स्थापित

– देश के हर मंदिर में रामोत्सव का पर्व मनाएगी विहिप

-20 जनवरी को अहम् बैठक, संघ भी होगा शामिल

प्रखर प्रयागराज। राम मंदिर निर्माण के लिए रास्ता साफ होने के बाद राम मंदिर के स्वरूप पर लगातार चर्चा हो रही है। इन सब के बीच विश्व हिंदू परिषद ने राम मंदिर का जो स्वरूप राम मंदिर आंदोलन के समय तैयार किया था उसका प्रतिरूप प्रयागराज में चल रहे माघ मेले में अंतिम बार स्थापित किया है। गौरतलब है कि राम मन्दिर आंदोलन के तत्कालीन विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल के नेतृत्व में राम मंदिर का स्वरूप पहली बार 1989 स्थापित यहीं किया गया था। अब अयोध्या में राम मंदिर निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इसे अंतिम बार यहां लोगों के दर्शन के लिए रखा है। बतादें कि माघ मेले में परेड ग्राउंड में स्थित विश्व हिंदू परिषद के शिविर में राम मंदिर के स्वरूप का अनावरण विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय ने किया। भगवान राम के मंदिर की स्थापना के मद्देनजर एक ही स्थान से विश्व भर से आने वाले राम भक्तो को आंदोलन से जोड़ने के निहित विहिप ने इस इसे प्रारम्भ किया था। इस स्वरूप को सीतापुर के कारीगरों द्वारा तैयार किया था। जिसे देश भर में विहिप ने जनजागरण अभियान के तहत यात्रा पर लेकर निकला और राम मन्दिर आंदोलन से गांव -गांव को जोड़ने का काम किया था। बता दें कि राम मंदिर का स्वरूप पहली बार सार्वजनिक रूप से माघ मेले में स्थापित किया गया है। माघ मेले में स्थापित विहिप के शिविर में क्षेत्रीय संगठन मंत्री अम्बरीष जी कहते है की विहिप का एक संकल्प पूरा हुआ। राम लला के विराजमान होने के साथ ही यह स्वरूप एक स्थान पर रख दिया जाएगा। जिसके बाद राम भक्तों को अयोध्या में भव्य राम मंदिर का दर्शन मिलेगा।अम्बरीष जी के मुताबिक़ माघ मेले में आगामी 20 जनवरी को विश्व हिंदू परिषद केंद्रीय मार्ग दर्शक मंडल की बैठक होने जा रही है। इस बैठक में संघ के नेताओं के भाग लेने की भी जानकारी मिल रही है। विश्व हिंदू परिषद माघ मेला शिविर में होने वाली इस अहम बैठक में राम मंदिर निर्माण को लेकर केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल महत्वपूर्ण निर्णय लेगा। वही 21 जनवरी को संत सम्मेलन में राम मंदिर मुद्दे पर देश भर से आए साधु- संतो से मंथन करेगी । इस बैठक में विहिप और संघ हिंदुत्व के स्वरूप पर भी चर्चा करेगा हिंदू धर्म छोड़कर गए लोगों को वापस लाने के बारे में भी विचार-विमर्श किए जाने की उम्मीद है।