विशेष ! मां काली शक्ति साधना केंद्र की दिव्य अवधारणा,भैया जी का दाल-भात

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प्रखर प्रयागराज। हिंदुस्तान की आधी आवाम का निवाला है दाल-भात, आम आदमी का मिजाज है दाल-भात, जरूरतमंदों की जरूरत है दाल-भात । दाल भात अपने आप में पूरे हिंदुस्तान को परिभाषित करने के लिए बहुत बड़ा नाम है। विद्यार्थी जीवन में विद्यार्थियों के लिए सबसे आसान भोजन होता है दाल-भात। लेकिन हम जिस दाल भात की बात कर रहे हैं इसके परिधि का दायरा धीरे-धीरे बहुत बड़ा होता चला जा रहा है। जी हां हम बात कर रहे हैं “भैया जी के दाल भात” की। कहते हैं भूखे को भोजन कराना किसी भी दान में सबसे बड़ा दान माना जाता है। और भैया जी की का दाल भात इसी परिकल्पना की उपज है। जिसे मां काली के अनन्य भक्त गुड्डू मिश्रा की परिकल्पना की उपज कहे तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। मां काली शक्ति साधना केंद्र की इस अवधारणा, भैया जी का दाल भात, प्रयागराज में भूखों के लिए जीने का संबल बना हुआ है । इस संगठन से जुड़े लोगों ने दिन रात एक कर गरीबों के लिए भोजन जुटाने का काम किया है।जिसमें समाज का भी बेहतर सहयोग लगातार मिल रहा है। बता दें कि संगम नगरी प्रयागराज में शुरू हुआ भूख मुक्त समाज की परिकल्पना से लबरेज यह कार्यक्रम भैया जी का दाल भात जीवों की भूख मिटाना ही अपना धर्म समझता है। मां अन्नपूर्णा की असीम कृपा से भूखों, मजबूर,और लाचारों की छुधा शांत होती है। भैया जी के दाल भात को अपने आप में संपूर्ण व्यंजन कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं है। क्या आम और क्या खास सबका सम्पूर्ण खुराक है भैया जी का दाल-भात। अमीर कि सेहत जब बिगड़ जाए तो डॉक्टर उसे दाल-भात खाने की सलाह देता है। गरीब की सेहत इसीलिए नहीं बिगड़ती कि वह दाल-भात ही खाता है। बहुत बड़े उद्देश्य को लेकर शुरू हुआ भैया जी का दाल भात भारत को भूख मुक्त बनाने का एक बड़ा संकल्प है। इसकी परिकल्पना में सादगी की वह अवधारणा है जिसमें व्यक्ति को भोजन कराते समय दम्भ का एहसास ना हो सके। लिहाजा भारतीयता से पूर्ण इस व्यंजन की अपनी एक आत्मीय विशेषता है क्या आम क्या खास सबके लिए भैया जी का दाल-भात। 23 नवंबर 2018 को तीर्थ नगरी प्रयागराज में शुरू हुआ भैया जी का दाल-भात तब से निरंतर चल रहा है। अपना एक वर्ष पूर्ण करने के बाद इसकी व्यापकता लगातार निरंतर बढ़ती जा रही है। दाल-भात की शुद्धता बस इससे लगाई जा सकती है कि चावल और दाल के अतिरिक्त इसमें सिर्फ और सिर्फ नमक और पानी ही डाला जाता है जो सबके लिए रुचि पूर्ण और स्वास्थ्य पूर्ण होता है। भैया जी का दाल-भात इस परिवार से जुड़े हुए लोगों ने भले ही इस मिशन का नाम दाल भात रखा हो लेकिन इसकी व्यापकता और विस्तार की चर्चा जब इससे जुड़े लोग करते हैं तो इसमें संपूर्ण भारत की तस्वीर उभरकर सामने आती है। मानव की सेवा और उसके लिए सर्वस्व न्योछावर कर देने का त्याग इस योजना से जुड़े लोगों के बीच रहकर महसूस किया जा सकता है । तमाम परेशानियों के बावजूद एक साल से निरंतर समाज की सेवा को समर्पित लोगों ने सेवा का जो नया आयाम तय किया है। उस आयाम से बाहर निकलना खुद अब इनके बस में भी नहीं है । सेवा को ही अपना जीवन मानने वाले यह समाजसेवी देश और समाज में व्याप्त भूख को खत्म करने के लिए लगातार जद्दोजहद कर रहे हैं । तमाम दिक्कतें परेशानियों का सामना करने के बावजूद भी भैया जी का दाल भात गरीबों,लाचारों, बेसहारों और जरूरतमंदों के लिए सदैव उपलब्ध है।

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