इलाहाबाद विवि के पूर्व कुलपति हंगलू को जांच पूरी होने तक देश न छोड़ने का आदेश

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-तमाम विवादों से रहा है प्रो हंगलू नाता

प्रखर प्रयागराज | पूरब के ऑक्सफोर्ड के नाम से विख्यात इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो रतनलाल हंगलू ने विवादों से बचने के लिए भले ही केंद्रीय विश्वविद्यालय से इस्तीफ़ा दे दिया हो। लेकिन मुसीबत उनका पीछा नहीं छोड़ रही है । उन्हें जांच पूरी होने तक देश न छोड़ने का फरमान सुनाया गया है । बतादें कि प्रोफ़ेसर हंगलू के विदेश जाने के रास्ते में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की जांच आड़े आ रही है। बता दें कि प्रोफेसर हंगलू के अरमानों पर कानूनी दांवपेच भारी पड़ेगा। जांच प्रक्रिया पूरी होने तक हांगलू देश नहीं छोड़ पाएंगे। बता दें कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अब तक के सबसे विवादित कुलपति के तौर पर चार साल का कार्यकाल बिताने वाले प्रोफेसर रतनलाल हांगलू विदेश जाने की तैयारी के साथ अपना इस्तीफ़ा भेजा था।जानकारों की माने तो उन्हें अमेरिका और कनाडा में काम अवसर मिला उन्होंने देर न करते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। जानकारों का दावा है कि हंगलू की कार्यशैली से मंत्रालय इतना खफा था कि उनके इस्तीफे की पेशकश मिलते ही फौरन मंजूरी देकर राष्ट्रपति के पास फाइल भेज दी। राष्ट्रपति ने भी तत्काल उन्हें पद मुक्त कर दिया।
वहीं प्रोफेसर रतनलाल हंगलू विवादों से दूर इलाहाबाद विश्वविद्यालय से दूर जाकर अपना नया अध्याय शुरू करते उसके पहले कानूनी दांवपेच के दायरे में उनका कैरियर फंस गया। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में वित्तीय अनियमितता का मामला हो चाहे यौन उत्पीड़न का केस दोनों मामलों में अभी हंगलू को क्लीन चिट नहीं मिली है ।विश्वविद्यालय से जुड़े सूत्रों की मानें तो जांच पूरी होने तक वह किसी भी कीमत पर देश छोड़ने की इजाजत नहीं पाएंगे। यदि जांच सही मिली तो हंगालू की मुसीबतें और बढ़ेंगी याद आरोप गलत मिले तो उनके अरमान पूरे हो सकते हैं।
प्रोफेसर हंगलू के इस्तीफे के बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रशासनिक अफसरों पर भी मंत्रालय नजर बनाए हुए हैं ।ऐसा इसलिए कि प्रशासनिक पदों पर बैठे कई अधिकारियों की शिकायत अब तक मंत्रालय को मिल चुकी है। लगातार छात्र नेता और शिक्षकों द्वारा दागी शिक्षकों को पद मुक्त करने की मांग की जा रही थी पर कुलपति रहते हुए प्रोफेसर हंगलू ने किसी की नहीं सोनी और अपना काम करते रहे। बड़ा सवाल यह है कि तमाम आरोपों के बीच हंगलू ने विदेश जाने के लिए अपना प्रयास क्यों शुरू कर दिया था जबकि वह एक प्रतिष्ठित केंद्रीय विश्वविद्यालय के मौजूदा कुलपति भी थे।

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