संशोधित नागरिकता कानून पर घर-घर जाएगी बीजेपी, 5 जनवरी से महाभियान

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prakhar purvanchal
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– बीजेपी के 5 बड़े नेता संभालेंगे कमान
– 5 से 15 जनवरी तक 10 दिन चलेगा अभियान
प्रखर दिल्ली। नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ देश में राजनीति चरम पर है। एक तरफ जहां कांग्रेस के नेतृत्व में समूचा विपक्ष इसे लोकतंत्र पर खतरा बताते हुए लगातार विरोध कर रहा है। तो वहीं दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी मजबूती के साथ इस पर अपना पक्ष रख रही है। भारतीय जनता पार्टी ने विशेष रणनीति बनाते हुए अब संशोधित नागरिकता कानून पर देश की आवाम के बीच जाने का फैसला लिया है । बाकायदा इसके लिए 5 जनवरी से 10 दिन तक  महा अभियान चलाया जा रहा है। जिसके लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपने पांच शीर्ष नेताओं को इस अभियान के लिए जिम्मेदारी भी सौंप दी है। जिसका नेतृत्व खुद गृहमंत्री अमित शाह करेंगे। बतादें कि पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के नेतृत्व में भाजपा  के शीर्ष नेता पांच जनवरी से घर-घर जाकर लोगों को संशोधित नागरिकता कानून के बारे में जागरुक करेंगे। इसके लिए अमित शाह जहां राष्ट्रीय राजधानी में होंगे, तो पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष जे पी नड्डा गाजियाबाद में रहेंगे। इनके अलावा रक्षामंत्री राजनाथ सिंह लखनऊ, परिवहन मंत्री नितिन गडकरी नागपुर और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जयपुर में पहले दिन अभियान का नेतृत्व करेंगे। भाजपा महासचिव अनिल जैन ने मीडिया को जानकारी देते हुए यह बताया कि
यह अभियान 10 दिनों तक चलेगा जिस दौरान पार्टी का तीन करोड़ परिवारों से संपर्क करने का इरादा है। भाजपा इस अभियान के जरिये कानून के खिलाफ विपक्षी दलों के प्रचार को भी निशाने पर लेना चाहती है। इसके अलावा जैन ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि भारतीय मुसलमानों के लिये नागरिकता से जुड़ी किसी भी कवायद से चिंतित होने का कोई कारण नहीं है, चाहे वह राष्ट्रीय जनसंख्या पंजी (एनपीआर) हो या एनआरसी। उन्होंने कहा कि भारत का एक मात्र धर्म उसका संविधान है। उन्होंने कहा कि पार्टी का घोषणा-पत्र रहे राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) को लागू करने को लेकर जब भी कोई फैसला लिया जाएगा उस पर राष्ट्रव्यापी विमर्श होगा, लेकिन अभी ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है। बता दें कि इस कानून के विरोध में विपक्ष के अलावा देश के तमाम बुद्धिजीवी और मुस्लिम संस्थाओं द्वारा किया जा रहा है।इसके लागू होने के साथ ही देश भर में धारा 144 लागू होने के बावजूद तमाम हिंसक प्रदर्शन किए गए थे। सरकार का कहना है कि इन हिंसक प्रदर्शनों के पीछे पीएफआई जैसी संस्था का हाथ है, जिसके तार पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े हुए हैं।

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