अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे विवाद पर, ईरान चाहता है भारत की मध्यस्थता!

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prakhar purvanchal
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-ईरान के राजदूत ने कहा अमेरिका-ईरान मामले पर भारत से मध्यस्थता की उम्मीद

– भारत का इरान और अमेरिका दोनों से है बेहद गहरा संबंध

प्रखर दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच इस युद्ध के माहौल में शांति की उम्मीद बनकर भारत सामने आ रहा है। भारत में ईरान के राजदूत
ने कहा कि अगर भारत, ईरान और अमेरिका के बीच में इस विवाद को कम करने के लिए किसी शांति प्रक्रिया की शुरुआत करता है तो हम उसका स्वागत करेंगे। बता दें कि अमेरिका और ईरान के बीच इस समय युद्ध जैसी स्थिति है । दोनों देश एक दूसरे के खिलाफ आग उगल रहे हैं । एक दूसरे के सैनिकों और नागरिकों को मारने का दावा किया जा रहा है। लेकिन इस बीच शांति के पहल की भी शुरुआत होती दिखाई दे रही है। ईरान द्वारा इराक स्थित अमेरिकी बेसों कैम्पों पर किये गए मिसाइल हमले के कई घंटों बाद भारत में ईरान के राजदूत डॉ. अली चेगेनी ने यह टिप्पणी की है उन्होंने कहा कि विश्व में शांति स्थापित करने में भारत की अहम भूमिका है।
डॉ. अली चेगेनी ने इस बात की उम्मीद जताई कि भविष्य में दोनों देशों (ईरान-अमेरिका) के बीच कोई विवाद नहीं खड़ा होगा।उन्होंने कहा, ‘ हमने जो भी किया है वह हमारी प्रतिक्रिया का हिस्सा है। जनरल कासिम सुलेमानी के अंतिम संस्कार में भाग लेने वाले लाखों लोगों ने सरकार से इसकी मांग की थी जिसे हमने कर दिया है। डॉ. अली चेगेनी ने कहा, ‘हम युद्ध नहीं चाहते। हम भारत सहित अपने भाइयों और बहनों के साथ इस क्षेत्र में शांति से रह रहे हैं। हम इस क्षेत्र में कोई तनाव नहीं चाहते हैं। गौरतलब है कि पिछले सप्ताह शुक्रवार को इराक की राजधानी बगदाद में अमेरिकी ड्रोन हमले में ईरान के शीर्ष कमांडर कासिम सुलेमानी के मारे जाने के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बेहद खतरनाक स्तर तक बढ़ गया है। अगर दोनों देशों ने स्थिति में काबू करने के प्रयासों पर पहल नहीं किया तो आगे और भयावह परिणाम सामने आएंगे। इसको भांपते हुए भारत में ईरान के राजदूत डॉ. अली चेगेनी ने बयान दिया है कि हम भारत सहित सभी देशों से ऐसी किसी भी शुरुआत का स्वागत करेंगे जो विवाद को कम करने में मददगार हो। खासतौर से भारत जो हमारा अच्छा दोस्त है, हम उसकी ऐसी किसी भी कोशिश का स्वागत करेंगे। इसके भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव की दशा में रविवार को ही ईरान के विदेश मंत्री जवाद जरीफ और अमेरिकी समकक्ष माइक पोम्पिओ से बातचीत कर दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव पर भारत की चिंता जाहिर किया था। चेगेनी ने अमेरिका द्वारा ईरान में की गई कार्रवाई पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि वह एक तीसरे देश में थे, इसलिए दुनिया के लिए बहुत जरूरी है कि वह इस तरह के अमानवीय, अवैध कार्य की इजाजत नहीं दे जो कि अंतरराष्ट्रीय अधिकारों के खिलाफ हों। जेगेनी ने अमरीका से सवाल करते हुए कहा कि ‘वह (सुलेमानी) उन लोगों में शामिल थे जिन्होंने दुनिया से आईएसआईएस के खतरे को दूर किया है। आपको उनकी हत्या क्यों करनी थी। इसका मतलब है कि आप आतंकवादियों का समर्थन कर रहे हैं। यदि जनरल सुलेमानी ने आईएसआईएस के खिलाफ कार्रवाई नहीं की होती तो भारत समेत यूरोप और पूरी दुनिया के साथ क्या हुआ होता इसका अंदाज़ा लगाना मुश्किल है। ईरानी राजदूत ने कहा कि दुनिया आतंकवाद रोधी नायक सुलेमानी की हमेशा ऋणी रहेगी है। उन्होंने कहा, ‘यही कारण है कि मेरे देश ने आज आधिकारिक रूप से जवाब दिया है। हम युद्ध नहीं चाहते, तनाव नहीं चाहते, सिर्फ अपने अधिकारों की रक्षा कर रहे हैं। एक सवाल के जवाब में जेगेनी ने कहा कि वह ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी की मौत के बाद भारत के रवैए से खुश नहीं हैं। ईरानी एंबेसी में रखी शोक पुस्तिका में संवेदना लिखने भारत की तरफ से कोई भी नहीं पहुंचा । जबकि तमाम देशों के राजनयिकों ने वहां पहुंचकर शोक पुस्तिका में अपनी भावनाओं को लिखा है। जबकि कई दशकों से भारत और ईरान के बीच बहुत ही बेहतर और दोस्ताना संबंध रहे हैं।

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