एनआरसी-सीएए-एनपीआर पर कांग्रेस ने विपक्षी दलों की बैठक बुलाई

– दिल्ली में बुलाई बैठक, सीएए-एनआरसी का कर रही विरोध

-कानून के विरोध में सड़कों पर उतरी कांग्रेस

प्रखर दिल्ली। नागरिकता संशोधन कानून का विरोध कर रही कांग्रेस, पहले से ही संसद में इस कानून का विरोध कर रही थी। अब उसने संसद के बाहर नागरिकता संशोधन कानून की मुखालफत शुरू कर दिया है।
इतना ही नहीं, कांग्रेस पार्टी खुलकर इस नागरिकता कानून के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों का समर्थन भी कर रही है।
इस पूरी जिम्मेदारी को प्रियंका गांधी अकेले उठा रही हैं। अब इस विरोध पर और कड़ा फैसला लेते हुए कांग्रेस चेयर पर्सन सोनिया गांधी ने दिल्ली में विपक्षी दलों की एक बैठक बुलाई गई है।
इसमें राहुल गांधी के भी शामिल होने की संभावना है। बताया जा रहा है कि बैठक में मौजूदा राजनीतिक हालात पर चर्चा की जाएगी। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सहित पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में कांग्रेस अपनी वापसी के लिए लगातार हाथ-पांव मार रही है । इसी कड़ी में नागरिकता संशोधन कानून उसे तुरूप का इक्का दिखाई दे रहा है लिहाजा इस मामले पर सबसे ज्यादा मुखर कांग्रेस है। कांग्रेश की यह प्रस्तावित बैठक आज 13 जनवरी सोमवार को दोपहर 2 बजे पार्लियामेंटके एनेक्सी में होनी है, जिसमें तमाम गैर-बीजेपी दलों को बुलाया गया है। इस बैठक में कांग्रेस के अलावा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी), डीएमके (द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम), समाजवादी पार्टी, आरजेडी, लेफ्ट, एयूडीएफ और अन्य दल हिस्सा ले रहे हैं। जानकारी के अनुसार इस मीटिंग के जरिए सीएए-एनआरसी और यूनिवर्सिटीज में हो रही हिंसा के मुद्दे पर कांग्रेस विपक्ष को लामबंद कर रही है, जिसका नेतृत्व सोनिया गांधी खुद करेंगी। हालांकि, इस बैठक से कुछ दलों ने दूरी भी बना ली है। लेकिन कांग्रेस अपने फैसले पर अडिग दिखाई दे रही है। मौजूदा समय में उसे अपना वोट बैंक वापस मिलता दिखाई दे रहा है। बता दें कि कई विपक्षी पार्टियां इस मामले पर फूंक-फूंक कर कदम बढ़ा रही हैं । लेकिन पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी और अन्य राज्यों में कांग्रेस इस मामले को लेकर सबसे ज्यादा मुखर है। ज्ञात हो कि उत्तर प्रदेश की प्रभारी और कांग्रेस की महासचिव प्रियंका वाड्रा गांधी उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा सक्रिय हैं । सीएए के विरोध में हिंसक प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार हुए लोगों के घर जाकर उन्होंने मिलना शुरू कर दिया था। जिसका सबसे मुखर विरोध बीजेपी लगातार कर रही है। इस मामले में राजनीति और गहरी होती जा रही है। इस मामले में समाजवादी पार्टी के नेता रामगोविंद चौधरी ने सीएए में गिरफ्तार लोगों को सपा की सरकार बनने के बाद पेंशन देने का एलान कर दिया , हालांकि इस मामले में सबसे संतुलित बयान बसपा सुप्रीमो मायावती का रहा है। अब देखना यह है कि क्या कांग्रेस के नेतृत्व में समूचा विपक्ष संगठित होकर इस कानून का विरोध करता है या फिर इस मामले में हमेशा की तरह कांग्रेस अकेले खड़ी दिखाई देती है।