मदरसे में पढ़ा मुस्तफा देश का सबसे बड़ा टिकट माफिया, आतंकियों को करता था फंडिंग!

– ई टिकट से 15 करोड़ का ट्रांजैक्शन हर महीने करता था
– आरपीएफ ने उड़ीसा से किया गिरफ्तार
प्रखर दिल्ली । मदरसे में पढ़ने वाले छात्रों को आमतौर पर धार्मिक और कम टेक्निकल माना जाता रहा है। लेकिन झारखंड के मदरसों से पढ़कर निकला गुलाम मुस्तफा नाम के एक व्यक्ति ने इसे गलत साबित कर दिया है । (आरपीएफ) यानी रेलवे प्रोटक्शन फोर्स ने एक ऐसे व्यक्ति को उड़ीसा से गिरफ्तार किया है जो रेलवे के टिकटों की बड़ी कालाबाजारी में संलिप्त था।
गुलाम मुस्तफा नाम के इस शख्स के पास आईआरसीटीसी की साइट हैक करने का नायाब तरीका था। जिसके सहारे उसने टिकटों की कालाबाजारी का बड़ा जाल फैला रखा था । इन टिकटों से होने वाली कमाई का एक बड़ा हिस्सा आतंकियों को भेजा जाता था। उसके साथ 27 अन्य लोगों को पकड़ा गया है। आरपीएफ के महानिदेशक (डीजी) ने बताया कि अब तक केवल गुलाम मुस्तफा का 15 करोड़ रुपये का ट्रांजैक्शन का पता चला है। यह रकम और ज्यादा भी हो सकती है और अगर सभी लोगों की रकम जोड़ दें तो इससे कई गुना ज्यादा रकम हो सकती है। जानकारी के अनुसार झारखंड के गिरीडीह के रहने वाला गुलाम मुस्तफा की पढ़ाई-लिखाई ओडिशा के केन्द्रपाड़ा के मदरसों में हुई है। मदरसों से पढ़कर निकला यह शख्स ईतना शातिर हो सकता है इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। आरपीएफ के हत्थे चढ़ा यह गुलाम मुस्तफा बेंगलुरु में बैठक कर ई-टिकट फर्जीवाड़ा का गिरोह का संचालन कर रहा था। उड़ीसा के मदरसों में पढ़ने के बाद में यह बेंगलुरु चला गया जहां इसने 2015 में रेलवे के काउंटर टिकट की दलाली शुरू की फिर इसने सॉफ्टवेयर की ट्रेनिंग ली और ई-टिकटों की कालाबाज़ारी से जुड़ गया। गुलाम मुस्तफ़ा के साथ कई सॉफ्टवेयर डेवलपर हैं और इनके नीचे 200-300 लोगों का पैनल 28,000 रुपये महीने पर काम करता है। पुलिसिया जानकारी के अनुसार इसके लिए कई सॉफ्टवेयर इंजीनियर काम करते थे । जो आईआरसीटीसी के सॉफ्टवेयर को हैक कर इसके लिए टिकट निकालने का काम करते थे । बता दें कि आमतौर पर एक मिनट में एक टिकट ही आईआरसीटीसी की साइट से निकल पाता है । जबकि इसके पास एक मिनट में तीन टिकट निकालने का सॉफ्टवेयर था । जिसके सहारे इसने करोड़ों रुपए कमाए और उन रुपयों को ट्रांजिट मनी और बिटकॉइन के जरिए  विदेश भेजा गया है। बता दें कि गुलाम मुस्तफा के लैपटॉप से पता चला है कि इसका संपर्क पाकिस्तान के कई संगठनों से हो सकता है।