मध्यप्रदेश में सियासत फिर गरमाई, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर शुक्रवार को 5 बजे के पहले होगा फ्लोर टेस्ट

प्रखर डेस्क। मध्य प्रदेश सियासत में भाजपा और कांग्रेस के बीच मची घमासान में बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट ने एक नया फैसला सुनाते हुए आदेश दिया कि शुक्रवार को 5 बजे के पहले हर हाल में फ्लोर टेस्ट करा लिया जाना चाहिए। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि विधानसभा में हाथ उठाकर फ्लोर टेस्ट कराया जाएगा और इसकी वीडियो रिकॉर्डिंग होगी। जिसके बाद मध्य प्रदेश की सियासत चीर गरमा गई है, जहां पर भाजपा अपना दावा मजबूत कर रही है । वहीं कांग्रेसी फ्लोर टेस्ट कराने के लिए पूरी तरह तैयार दिख रही है। अब देखना यह है कि शुक्रवार को फ्लोर टेस्ट में क्या नतीजा निकल कर सामने आता है? बतादे कि सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को मध्यप्रदेश में चल रहे सियासी संकट को लेकर सुनवाई हुई। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला देते हुए कहा कि मध्यप्रदेश विधानसभा में शुक्रवार को ही फ्लोर टेस्ट करवाया जाए। बतादे कि इससे पहले लगातार कांग्रेस की तरफ से वकील कपिल सब्बिल और अभिषेक मनु सिंघवी फ्लोर टेस्ट न करवाने की मांग कर रहे थे। सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान आदेश दिया कि सदन में हाथ उठाकर वोटिंग होगी और इस पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी। फ्लोर टेस्ट शाम पांच बजे से पहले पूरा करना होगा।
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि यदि बागी विधायकों को सदन में आने में किसी भी तरह का खतरा या डर है तो मध्यप्रदेश और कर्नाटक के डीजीपी उन्हें सुरक्षा प्रदान करवाएं और यह सुनिश्चित करें कि उन्हें किसी भी प्रकार का कोई खतरा न हो। कोर्ट का फैसला आने के बाद बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह सरकार केवल बहुमत खो चुकी सरकार नहीं बल्कि दलालों की सरकार है जिसने लोगों को धोखा दिया है। इनकी फ्लोर टेस्ट में हार निश्चित है। वहीं विपक्ष के नेता गोपाल भार्गव ने कहा कि यह स्वागत योग्य फैसला है और कल अब पूरी तस्वीर साफ हो जाएगी। वहीं बीजेपी के नेता बाबुल सुप्रीयो ने फैसले पर खुशी जताते हुए कहा कि हमेशा से ही मध्यप्रदेश की जनता बीजेपी की सरकार चाहती थी। इस बात को देखकर दुख होता है कि किस तरह से कमलनाथ मुख्यमंत्री बनने के लिए काम किए। वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जीतू पटवारी ने कहा कि हम इसके लिए हमेशा से तैयार थे। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस बारे में खुद स्थिति स्पष्ट की थी। यह जरूरी है कि जिन विधायकों को बंधक बनाया गया उन्हें सामने लाया जाए। सदन सुप्रीम कोर्ट के आदेश को मानने के लिए बाध्य है और हम अपना बहुमत सिद्ध करने को लेकर आश्वस्त हैं।