ग़ाज़ीपुर- सहजन, पपीता, पालकी आदि पौधों से लहलहाएगी ‘पोषण वाटिका’

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• आंगनबाड़ी केन्द्रों पर लगाए जाएंगे पोषण से भरपूर पौधे
• बच्चों, किशोरियों और गर्भवती के लिए होगा लाभदायी

प्रखर ब्यूरो गाजीपुर। राष्ट्रीय पोषण माह के तहत आंगनबाड़ी केन्द्रों पर तैयार की जा रही पोषण वाटिका पर विशेष रूप से ज़ोर दिया जा रहा है। इस क्रम में गत दिवस जनपद के 4127 आंगनबाड़ी केंद्रों पर वृक्षारोपण कर पोषण माह मनाया गया। इस कार्यक्रम में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता द्वारा सहजन, पपीता, गिलोय, तुलसी, पालक, आंवला, नीबू, लौकी सहित तमाम वृक्ष लगाए गए, जिनके फलों से आने वाले समय में कुपोषित बच्चों को सुपोषित किया जा सके।
प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी अरुण कुमार दुबे ने बताया कि जिले के सभी आंगनवाड़ी केंद्रों में पोषण वाटिका बन रही है। इनमें सहजन, पपीता, पालक, आंवला, नीबू, लौकी आदि लगाया जा रहा है। पोपण वाटिका में हरी सब्जियों और पत्तेदार सब्जियों और जिनमें आयरन ज्यादा पाया जब है उस पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। इसके माध्यम से बच्चों को मिड-डे मिल पोषक आहार से युक्त भोजन दिया जाएगा। अरुण कुमार दुबे ने बताया कि सहजन की पत्तियों में कैल्शियम और विटामिन-सी के अलावा प्रोटीन, पोटेशियम, आयरन, मैगनीशियम और विटामिन-बी कॉम्पलैक्स भी प्रचुर मात्रा में होता है। इन्हीं विशेषताओं के कारण सहजन को मेडिकल प्लांट भी कहा जाता है। इसके पत्तियों में भरपूर मात्रा में आयरन और कैल्शियम मौजूद होता है। वहीं पपीते में सबसे अच्छे पाचक एंजाइम होते हैं जो कि भोजन को पचाने और स्वांगीकरण में सहायक होते है। स्वांगीकरण का मतलब भोजन के पाचन के बाद उसे आंतों में मौजूद वाहिकाओं द्वारा अवशोषित किए जाने की प्रक्रिया। वहीं पालकी और बथुआ आयरन भरपूर होता है जो शरीर में खून की कमी की स्थिति में बेहद कारगर होता है। साथ ही इनमें अच्छा रफेज( खुरदरापन) होने से कब्ज में भी लाभ होता है।
जिला स्वस्थ भारत प्रेरक जितेंद्र कुमार गुप्ता ने बताया कि पोषण माह के अंतर्गत तैयार की जा रहीं पोषण वाटिका जिसकी देखरेख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा की जाएगी। भविष्य में निश्चित ही केंद्र पर आने वाले कुपोषित बच्चों और गर्भवती को सुपोषित करने में अहम भूमिका निभाने के साथ ही पर्यावरण को संरक्षित करने में भी अपना अहम योगदान निभाएंगे।