विद्यापीठ में भ्रष्टाचार के खिलाफ अकेले लड़ाई लड़ रहे पूर्व छात्र आरटीआई एक्टिविस्ट सुधांशु सिंह

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प्रखर वाराणसी। गांधी के हाथों काशी विद्यापीठ का नींव इस मंशा से रखा गया कि इस संस्था की कोख से ईमानदार औऱ राष्ट्र प्रेमी शिक्षित नौजवान पैदा होंगे, वही महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ आज भ्र्ष्टाचार औऱ काले कारनामों से सुर्खियों में है। वह भी अपने दूसरे सबसे बड़े पदभार रखने वाले कुलसचिव की काली करतूतों से।
यह बात गौर करने लायक है कि बिना परीक्षा नियंत्रक की सहमति के परीक्षा सम्बन्धी सामग्रियों की बड़े पैमाने पर खरीद फरोख्त की जाती है औऱ इस खरीद की प्रक्रिया से उसके लिए सुनिश्चित परीक्षा समिति को न अवगत कराया जाता है औऱ न ही सरकारी खरीद के लिए जो मानक तय किये गये उसका ही अनुकरण किया जाता है औऱ वित्त अधिकारी औऱ कुलसचिव मिलकर भारी मात्रा में कमीशन लेकर महंगे दामो में आवश्यकता से अधिक की खरीद का आदेश पारित कर करोड़ो का घोटाला कर देते है।
यह करोड़ो का भ्र्ष्टाचार निश्चित रूप से उन आम विद्यार्थियों के अभिभावको की गाढ़ी कमाई के लूट के साथ साथ भारत सरकार के पैसों की लूट है ।
सुधांशु इसके लिए धन्यवाद के पात्र है क्योंकि इन्होंने खुली लूट का न केवल विरोध किया है बल्कि उंसको शासन के संज्ञान में लाकर इसकी खुली जांच कराने के लिये जदोजहद भी कर रहे है।
गांधी की इस संस्था को बचाने की जिमेदारी का जो बीड़ा सुधांशु ने अपने कंधों पर उठाया है। बता दें कि सुधांशु इस प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र भी रहे हैं। अब जरूरत है महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से प्रत्यक्ष औऱ अप्रत्यक्ष तौर पर जुड़े सभी विद्यार्थियों औऱ शिक्षकों के अलावा आम नागरिकों की भी यह जिम्मेदारी बनती है कि वह आप के इस अभियान में आपके साथ खड़े होवे तभी इस संस्था का अस्तित्व औऱ साख दोनो बचेगी। बता दें कि सुधांशु सिंह आरटीआई एक्टिविस्ट के तौर पर सक्रिय हैं पूर्वांचल से जुड़े तमाम मसलों पर उन्होंने जानकारियां जुटाकर बहुत से भ्रष्टाचारियों और सफेदपोशों का काला चिट्ठा खोलने का काम किया है। विद्यापीठ में हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ इसके पूर्व और वर्तमान छात्र एकजुट होकर अब बड़े आंदोलन के मूड में दिखाई दे रहे हैं।