साल के अखिरी मन की बात में बोले पीएम मोदी, खूब चुनौतियां आईं लेकिन हमने हर संकट से लिए सबक

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मन की बात 2.0 का 19 वां संस्करण में बोले मोदी

प्रखर नई दिल्ली/एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज साल 2020 में आखिरी बार आज मन की बात के जरिए देश को संबोधित किया करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी का मन की बात का ये 72 वां संस्करण था। वहीं मन की बात 2.0 का 19वां संस्करण। आपको बता दें कि यह कार्यक्रम हर महीने के आखिरी रविवार को प्रसारित किया जाता है। इस कार्यक्रम का सुबह 11 बजे आकाशवाणी और दूरदर्शन पर सीधा प्रसारण किया जाता है। प्रधानमंत्री ने मन की बात कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि चार दिन बाद नया साल शुरू होने वाला है। अब अगली मन की बात 2021 में होगी। उन्होंने कहा कि देश में नया सामर्थ्य पैदा हुआ है। इस नई सामर्थ्य का नाम आत्मनिर्भरता है। उन्होंने कोरोना वायरस, लॉकडाउन, आत्मनिर्भर भारत अभियान, स्वच्छ भारत अभियान, तेंदुओं-शेरों की आबादी, समुद्र तटों की सफाई और लोगों के उन्हें भेजे गए पत्र आदि का जिक्र किया। हालांकि प्रधानमंत्री ने एक महीने से जारी किसान आंदोलन पर एक शब्द नहीं कहा। कार्यक्रम से पहले माना जा रहा था कि पीएम किसानों की समस्याओं पर देश को संबोधित कर सकते हैं, पर ऐसा नहीं हुआ। प्रदर्शनकारी किसान केंद्र के तीन नए कृषि बिलों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। अन्नदाताओं की राय है कि ये बिल कृषि विरोधी हैं। कोरोना के कारण, आपूर्ति श्रृंखला दुनिया भर में बाधित हो गई, लेकिन हमने प्रत्येक संकट से नए सबक सीखे। राष्ट्र ने नई क्षमताओं को भी विकसित किया है। इस क्षमता को हम आत्मनिर्भरता कह सकते हैं। अधिकतर पत्रों में लोगों ने देश के सामर्थ्य, देशवासियों की सामूहिक शक्ति की भरपूर प्रशंसा की है। जब जनता कर्फ्यू जैसा अभिनव प्रयोग, पूरे विश्व के लिए प्रेरणा बना, जब ताली-थाली बजाकर देश ने हमारे कोरोना वॉरियर्स का सम्मान किया था, एकजुटता दिखाई थी उसे भी कई लोगों ने याद किया है।
देश के सम्मान में सामान्य मानवी ने इस बदलाव को हमसूस किया है। मैंने देश में आशा का एक अद्भुत प्रवाह भी देखा है। चुनौतियां खूब आई, संकट भी अनेक आए। कोरोना के कारण दुनिया में सप्लाइ चेन को लेकर अनेक बाधाएं भी आई, लेकिन हमने हर संकट से नए सबक लिए। हमें वोकल फॉर लोकल की भावना को बनाये रखना है, बचाए रखना है, और बढ़ाते ही रहना है। आप हर साल न्यू ईयर रेजोल्यूशन लेते हैं, इस बार एक रेजोल्यूशन अपने देश के लिए भी जरुर लेना है। आज के ही दिन गुरु गोविंद जी के पुत्रों, साहिबजादे जोरावर सिंह और फतेह सिंह को दीवार में जिंदा चुनवा दिया गया था। अत्याचारी चाहते थे कि साहिबजादे अपनी आस्था छोड़ दें, महान गुरु परंपरा की सीख छोड़ दें, लेकिन हमारे साहिबजादों ने इतनी कम उम्र में भी गजब का साहस दिखाया, इच्छाशक्ति दिखाई। दीवार में चुने जाते समय, पत्थर लगते रहे, दीवार ऊँची होती रही, मौत सामने मंडरा रही थी, लेकिन, फिर भी वो टस-से-मस नहीं हुए।
भारत में तेंदुओं की संख्या में, 2014 से 2018 के बीच, 60 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। देश के अधिकतर राज्यों में, विशेषकर मध्य भारत में, तेंदुओं की संख्या बढ़ी है। तेंदुए की सबसे अधिक आबादी वाले राज्यों में, मध्यप्रदेश, कर्नाटका और महाराष्ट्र सबसे ऊपर हैं। यह एक बड़ी उपलब्धि है। देश के सम्मान में सामान्य मानवी ने इस बदलाव को महसूस किया है। मैंने देश में आशा का एक अद्भुत प्रवाह भी देखा है। चुनौतियां खूब आई, संकट भी अनेक आए। कोरोना के कारण दुनिया में सप्लाई चेन को लेकर अनेक बाधाएं भी आई, लेकिन हमने हर संकट से नए सबक लिए। गीता की ही तरह, हमारी संस्कृति में जितना भी ज्ञान है सब जिज्ञासा से ही शुरू होता है। वेदांत का तो पहला मंत्र ही है श्अथातो ब्रह्म जिज्ञासाश्, अर्थात आओ हम ब्रह्म की जिज्ञासा करें। इसलिए तो हमारे यहां ब्रह्म के भी अन्वेषण की बात कही जाती है। जिज्ञासा की ताकत ही ऐसी है। कश्मीरी केसर वैश्विक स्तर पर एक ऐसे मसाले के रूप में प्रसिद्ध है, जिसके कई प्रकार के औषधीय गुण हैं। यह अत्यंत सुगन्धित होता है, इसका रंग गाढ़ा होता है और इसके धागे लंबे व मोटे होते हैं। जो इसकी औषधीय मूल्य को बढ़ाता है।