भ्रष्टाचार का वीडियो वायरल होने पर तिलमिलाए पुलिस और समाजसेवी

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प्रखर चंदौली । मोहरगंज पुलिस चौकी पर तैनात पुलिसकर्मी का खुलेआम पैसा लेना और पीड़ित महिला का बयान सामने आने के बाद इस मामले पर समाजसेवियों के वीडियो सामने आए हैं । जिसमें आबादी की जमीन पर वर्षों से रह रहे अनुसूचितजाति की महिला के जमीन पर कब्जा जमाने के लिए दबंग ‘सरकारी नेता” यानी जिस पार्टी की सरकार उस पार्टी की नेतागिरी करने वाले और समाज सेवा करने वाले वकील साहब इस पूरे वीडियो को झूठा और भ्रामक बताते हुए मानहानि की बात कर रहे हैं। अब सवाल यह है कि आखिर इस वीडियो में टेंपरिंग या छेड़छाड़ की रिपोर्ट वकील साहब के पास कहां से आई है ? या फिर किसी विशेष प्रयोजन की वजह से वकील साहब अखबार के ऊपर ऐसा आरोप लगा रहे हैं। गौर करने वाली बात यह भी है कि समाजसेवी वकील साहब पुलिस को क्लीनचीट देने के साथ-साथ “सरकारी नेता” की भी दिल खोल कर तारीफ कर रहे हैं।
अब तक महिला के मकान पर पुलिस जबरिया कब्जा कराने का प्रयास कर रही थी और अब वकील साहब भी इस मामले में खासी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। सवाल यह है कि आबादी की जमीन जिसको “सरकारी नेता” ने किसी दूसरे से लिखवाया है आखिर किस भरोसे पर लिखवाया है । जबकि उस जमीन पर महिला का ही कब्जा बरकरार है। मामला ये है कि उस मकान को बरसों से आबाद अनुसूचित जाति की महिला पूजा देवी के पति गुल्लू राम से शिवपूजन पाल ने लिखवाया था। इस मामले में पर गुल्लू राम की माता जिनको दिखाई नहीं देता है उनका कहना है कि मैंने अपनी जमीन किसी को बेचने का अधिकार नहीं दिया है। यह मेरी जमीन है मैंने अपने तीनों बेटों को इस जमीन पर सिर्फ रहने का अधिकार दिया है। मेरे रहते अगर किसी ने इस जमीन पर कब्जा करना चाहा तो मैं इसी में दफन हो जाऊंगी। बतादें कि मकान पर पर कभी कब्जा नहीं ले पाये शिवपूजन पाल ने उस मकान को “सरकारी नेता” को बेच दिया। जिस पर नेता जी पुलिस के भरोसे कब्जा करना चाहते हैं। बतादें कि अनुसूचित जाति के किसी भी व्यक्ति की जमीन बगैर जिला अधिकारी के अनुमति से नहीं खरीदी जा सकती है। लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ है। वीडियो वायरल होने के बाद लगातार पुलिस द्वारा इसे झूठा और भ्रामक बताया जा रहा है जबकि वीडियो में पुलिसकर्मी साफ तौर पर पैसे पकड़ते हुए दिखाई दे रहा है। जानकारी के अनुसार यह जमीन गुल्लू राम के पिता किरोधन राम को ग्राम सभा से पट्टे पर आबाद होने के लिए दी गई थी। जिनकी मौत 2013 में हुई है। हमें प्राप्त जानकारी के अनुसार पट्टे की जमीन किसी को बेची नहीं जा सकती है। लेकिन इस मामले में समाजसेवी वकील साहब के पास हमसे ज्यादा जानकारी उपलब्ध हो सकती है। शायद इसीलिए वह नेताजी के साथ-साथ पुलिस को क्लीन चिट दे रहे हैं। इस मामले पर स्वतः संज्ञान लेने वाले समाजसेवी वकील साहब को पीड़ित महिला के दर्द और उसकी मजबूरियों पर आखिर तरस क्यों नहीं आया। जबकि वकील साहब छात्र राजनीति में बहुत सक्रिय रहने के अलावा पदाधिकारी भी रहे हैं। अगर समाजसेवी और राजनेता गरीबों,कमजोरों,मजलूमों और दलितों के साथ खड़े होने की बजाय ताकतवर,दबंग और सरकारी लोगों के साथ खड़े होने लगे तो फिर समाज में संतुलन बिगड़ जाएगा।