नोडल अधिकारी की जांच में खुली अस्पताल की कलई, सीएमएस को लगाई कड़ी फटकार


बिना जांच रिपोर्ट आये एक मरीज को कर दिया गया डेंगू वार्ड में भर्ती

प्रखर जौनपुर। जिले के नोडल अधिकारी व चिकित्सा एवं शिक्षा विभाग के सचिव जी एस प्रियदर्शी ने शनिवार को जिला चिकित्सालय में रैंडम चेकिंग की तो ढेरों खामियां उजागर हो गई। एक मरीज की बिना जांच रिपोर्ट आये ही उसे डेंगू वार्ड में भर्ती कर दिया गया था। इतना ही नहीं अस्पताल में दलालों के बढ़ते वर्चस्व की शिकायत मिलते ही
सचिव ने सीएमएस को कड़ी फटकार लगाई।
मजे की बात रही कि हर खामियों के बारे में पुछे जाने पर सीएमएस ने शासन को पत्र प्रेषित करने की बात करते रहे।
उन्होने जिला अस्पताल का लिफ्ट प्रतिदिन चलने का दावा किया तो मौके पर मौजूद मरीज के तीमारदारों ने उनके दावे की कलई खोलकर रख दिया। बोले लिफ्ट कभी नहीं चलती, सिर्फ वीवीआइपी के आने पर ही चालू कर दिया जाता है।
फीवर हेल्प डेस्क पर क्लीनिक स्टाफ रखे जाने हेतु निर्देश सीएमएस डॉक्टर ए.के. शर्मा को दिये और ओपीडी के निरीक्षण के दौरान पाया कि अस्पताल में भीड़ ज्यादा लग रही है। जिस पर सीएमएस को निर्देश दिया कि कुछ लोगों को ऊपर के तल पर बैठाने की व्यवस्था की जाए। नोडल अधिकारी द्वारा सीएमएस को निर्देशित किया गया कि जिला अस्पताल में बैठने वाले डॉक्टर इलाज से संबंधित सभी उपकरण के साथ ही बैठे। उन्होंने सीएमएस को निर्देशित किया कि लिफ्ट तत्काल चालू किया जाए। रेडियोलॉजिस्ट की कमी को पूर्ण करने की कार्यवाही की जाए। सेंट्रल लैब के निरीक्षण के दौरान कहा कि थायराइड की मशीन को एक सप्ताह में चलाएं जाना सुनिश्चित करें तथा महिला वार्ड में बेड पर पर्दा लगाया जाए। बच्चों का वजन नियमित रूप से नापा जाए। नोडल अधिकारी के द्वारा पीकू वार्ड का भी निरीक्षण किया गया। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी जीएसबी लक्ष्मी, जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी आर डी यादव सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहें।

अफसर के आने से पहले सब कुछ हो गया अलर्ट

जौनपुर। जिला अस्पताल में निरीक्षण करने पहुंचे जीएस प्रियदर्शी के आने से पहले अस्पताल की सभी खामियों को पूरी तरह से दुरुस्त कर दिया गया था। सीएमएस समेत सभी छोटे-बड़े कर्मियों को इस बात की भनक लग गई थी कि अस्पताल का निरीक्षण होना है । लिहाजा सभी खामियों पर पर्दा डाल कर व्यवस्था को पूरी तरह से चाक-चौबंद कर दिया गया था। इतना ही नही अधिकारी की आंख में धूल झोंकने की पूरी कवायद भी हो गई थी, लेकिन अस्पताल की सबसे बड़ी खामियां आखिरकार अधिकारी की जांच में सामने आ गई।