विश्वनाथ कॉरिडोर में अवैध दुकान आवंटन मामले में एफआईआर दर्ज जांच कमेटी बनाकर जांच शुरू

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प्रखर वाराणसी। बाबा विश्वनाथ कॉरिडोर में दुकान अवैध तरीके से आवंटन के मामले को प्रशासन ने गंभीर रूप से संज्ञान में लेते हुए एफ आई आर दर्ज कर जांच कमेटी गठित कर दी है। जिसके बाद जांच कमेटी ने जांच शुरू कर दी है। बता दें कि सोशल मीडिया पर बाबा विश्वनाथ कॉरिडोर में दुकान आवंटन के लिए एक मैसेज डाला गया था, जिसमें दुकान खरीदने के लिए रकम व दुकान का एरिया बताया गया था। जिसमें सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पता चला कि कुछ लोगों ने दुकान के लिए दुकान आवंटन के नाम पर जलसाजों को 35- 35 लाख रुपए दिए हैं। बतादे कि दो सदस्यीय जांच कमेटी सोशल मीडिया के माध्यम से फर्जीवाड़ा करने वालों की शिनाख्त करने में लगी हुई है। साथ ही वृहस्पतिवार की देर शाम विश्वनाथ कॉरिडोर प्रशासन ने इस मामले में दो लोगों के खिलाफ एफआईआर चौक थाने में दर्ज कराई है। जांच कमेटी में एसडीएम ज्ञानवापी एवं काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी को शामिल किया गया है। कमेटी शुरुआती जांच में ‘रीयल एस्टेट बिजनेस वाराणसी लॉयन ग्रुप नाम के फेसबुक पेज की सभी पोस्ट की पड़ताल कर यह पता करने का प्रयास कर रही है कि कॉरिडोर में दुकान आवंटन अथवा पंजीकरण का फर्जी खेल कितने समय से चल रहा है। वही परिसर के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी डॉ. सुनील वर्मा ने आंतरिक जांच कमेटी बनने और जांच आरंभ होने की बात कही है। कॉरिडोर प्रशासन के कहना है कि यह एक गंभीर विषय है । इसको गंभीरता से लिया गया है। बताया जा रहा है कि कॉरिडोर की दुकानों के लिए पंजीकरण के फर्जीवाड़े में प्रशासन की ओर से दो लोगों के खिलाफ एफआईआर में फेसबुक पर दुकानों का रेट और बिक्री का पोस्ट डालने वाले शशिकांत चौरसिया को नामजद किया गया है। वहीं एफआईआर के दूसरे नाम उसे प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति को अज्ञात के रूप में शमिल किया गया है। बतादे कि मामला उजागर होने पर प्रखर पूर्वांचल ने जब फेसबुक पोस्ट करने वाले की जानकारी निकाली तो पता चला कि फसेबूक पोस्ट करने वाले को मोहरा बनाकर किसी गैंग का यह काम है। फेसबुक पोस्ट डालने वाले शशिकांत चौरसिया ने बताया की मुझे एक मेरे मित्र आशु ने दिया जो बीएचयू के पास रहता है। जिन्हें मैं पिछले 5 वर्षों से जानता हूं। मेरे साथ रियल स्टेट का काम करते हैं, उन्होंने मुझे कहा कि विश्वनाथ कॉरिडोर में दुकान मैं बेच रहा हूं, जिसे तुम अपने फेसबुक पर डाल दो और कस्टमर आएंगे तो मैं तुम्हें कुछ कमीशन दूंगा। शशिकांत ने बताया कि महोदय मैं बहुत छोटा सा रियल स्टेट का व्यापारी हूं। मुझे मेरे मित्र ने बहुत बुरी तरह फंसा दिया है। उसने प्रखर पूर्वांचल को मामले से जुड़े कई और साक्ष्य भी दिए हैं। जिसे उसके मित्र आशु ने दिया था। साथ ही शशिकांत चौरसिया ने आंसू का मोबाइल नंबर भी दिया, जिस पर प्रखर पूर्वांचल ने बात की तो वह दुकान वाली बात को स्वीकारा लेकिन गोल- गोल घुमा कर बातों को बदलता रहा। अब तो जांच के बाद ही पता चलेगा कि कौन दोषी है।