ग़ाज़ीपुर- आग की भांति बरस रही गर्मी से बचाव के लिए लोगो को तालाब और नदियों का सहारा

प्रखर ब्यूरो खानपुर/ग़ाज़ीपुर। वर्ष भर में मई और जून के महीना वैसे तो तपिश वाली गर्मी का होता है, परन्तु इस वर्ष की गर्मी ज्यादा भयावह हो गई है। वर्तमान समय में गर्मी अपने चरम पर जारी है। यह धीरे-धीरे अपना और भी रौद्र रूप अख्तियार करती जा रही है। भीषण गर्मी के चलते इस गर्मी के मौसम में मनुष्य सहित जानवर व पक्षी आदि भी जिस चीज को सबसे अधिक खोजते हैं, वह है पानी तथा ठंडी छांव। इन दिनों पड़ने वाली गर्मी बड़ों की तो बात क्या करें, युवा भी कुछ ही दूरी चलने पर गर्मी को सहन नहीं कर पा रहे हैं। वह भी चार कदम चल कर हांफ जाते हैं। सभी ठंडी छांव की तलाश में रहते हैं। यदि किसी को पास में बह रही नदी, नहर या तालाब आदि मिल जाए, तो क्या बात। इस मौसम में युवा व बच्चे तो जहाँ भी मौका मिला पानी से अपने को तर करने का एक भी मौका नहीं छोड़ रहे हैं। इन दिनों हो रही गर्मी से बचाव के लिए जब भी मौका मिलता है, दोपहर में वह पास में के तालाब में खुद को नहाने से नहीं रोक पाते हैं। ऐसा नहीं है कि वह अकेले ही नहाते हैं, उनके साथ उनके साथी भी तालाब में जमकर मस्ती करते हैं। उन्हें जब भी सुबह हो या शाम मौका मिलता है, तो वह समरसेविल आदि का प्रयोग करके खुद को पानी से साराबोर कर लेते हैं। एक छोटे से बच्चे आलोक प्रजापति और धर्मेंद्र गौड का कहना था कि उन्हें गर्मी के मौसम में इस प्रकार से समरसेविल चलाकर पाईप द्वारा नहाना इस मौसम में बड़ा ही अच्छा लगता है। इससे कुछ समय के लिए तो गर्मी से निजात मिल ही जाती है। इसके साथ ही वह अपने गमलों में लगी फुलवारी को भी प्रतिदिन प्रात: को पानी देना व पक्षियों के लिए छत पर पानी रखना कदापि नहीं भूलते हैं। पशु-पक्षियों सहित पेड़ पौधों को भी पानी की इस समय अधिक आवश्यकता होती है। हमें अपने साथ इनका भी ख्याल रखना चाहिए, क्योंकि यह भी हमारी जिंदगी के अहम् अंग हैं। जहां आमजन प्रभावित हो रहा है, वहीं जानवर आदि भी प्रभावित हो रहे हैं। वर्तमान समय में इसके कम होने के अवसर कम ही नजर आ रहे हैं। इससे आमजन पूरी तरह से त्रस्त नजर आ रहा है। मनुष्य तो क्या पशु-पक्षी आदि भी आग की भांति बरस रही गर्मी से बचाव के तरीके खोज रहे हैं।