स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य बनाने पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

प्रखर एजेंसी। शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती के दिवंगत होने के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती अगले शंकराचार्य घोषित हुए थे। जिसको लेकर कई पीठों को आपत्ति थी। जिसके बाद न्यायमूर्ति बी आर गवरी और न्यायमूर्ति बीवी नागरतना की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता द्वारा पीठ को यह सूचित करने के बाद आदेश पारित किया है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य बनाने पर रोक लगा दिया जाए। पूरी में गोवर्धन मठ के शंकराचार्य ने हलफनामा दायर किया है कि अविमुक्तेश्वरानंद को नए शंकराचार्य के रूप में नियुक्त का समर्थन नहीं किया गया है। पीठ ने कहा है कि अर्जी में किए गए अनुरोध के मद्देनजर आवेदन को मंजूर किया गया है। सुप्रीम कोर्ट एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें आरोप लगाया गया है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने दिवंगत शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती द्वारा ज्योतिष पीठ के उत्तराधिकारी के रूप में उन्हें नियुक्त किए जाने का झूठा दावा पेश किया है। यह मामला 2020 से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। याचिका में कहा गया है कि यह सुनिश्चित करने का एक जानबूझकर प्रयास किया गया है कि इस अदालत में सक्षम कार्रवाई निष्फल हो जाए।