धर्म और आस्था में रत रहने वाली रमावती देवी का 107 वर्ष की उम्र में निधन

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प्रखर आजमगढ़। सनातन धर्म में वर्णित आश्रम व्यवस्था में अंतिम आश्रम सन्यास का पालन इस समय में बड़ी कठिनाई से हो पा रहा है।क्योंकि अब लोगों की उम्र ही 70 ,80 वर्ष तक जाते जाते इति हो जाती है। लेकिन पहले यह व्यवस्था वर्णित थी जिसमें 0 से 25 वर्ष तक ब्रम्हचर्य, 25 से 50 वर्ष तक गृहस्थ,50 से 75 वर्ष तक वानप्रस्थ और 75 से 100 वर्ष तक सन्यास आश्रम की होती थी।उसी क्रम में लगभग 1915 में जन्म लेने वाली रामावती देवी ने स्वतंत्रता संग्राम को देखते हुए व यथा संभव सहयोग करते हुए आज रविवार को यानी की 11 दिसंबर को अंतिम सांस लीं।एक सौ सात वर्ष तक जीवित रहने वाली आजमगढ़ जिले के मेहनगर तहसील अंतर्गत ग्राम कोटा में रहने वाली रमावती देवी थीं।उनकी अंतिम विदाई सोमवार को होगी जिसमें अधिकांश लोग शामिल होंगे।