वाह रे वाराणसी आरटीओ! चोरी की बाइक आज़मगढ़ मे हो गई दो बार ट्रांसफर

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प्रखर वाराणसी। परिवहन विभाग में घोटाला व घालमेल आम बात है, इससे कोई भी अछूता नहीं है। आप चाहे जिस से भी पूछेंगे परिवहन विभाग कैसा है तो कोई भी कहेगा की दलाली का अड्डा है। परिवहन विभाग ऐसा ही वाकया वाराणसी में निकल कर सामने आया है, जहां पर चोरी की बाइक को परिवहन विभाग में 2 बार ट्रांसफर कर दिया। बता दें कि वाराणसी के सिगरा थाना के शास्त्री नगर कॉलोनी से 20 वर्ष पहले चोरी की गई बाइक का आजमगढ़ कार्यालय में दर्ज होने के साथ दो लोगों को ट्रांसफर कर दिया गया। आश्चर्य है कि आजमगढ़ कार्यालय ने बनारस आरटीओ से अनापत्ति प्रमाण पत्र भी नहीं लिया। उक्त बाइक का नंबर बनारस के परिवहन कार्यालय में ब्लॉक है, फिर भी नंबर का नवीनीकरण हो गया। शास्त्री नगर कॉलोनी के रहने वाले अधिवक्ता रामनरेश सिंह की पत्नी गुड़िया सिंह के नाम बाइक 9 जनवरी 1997 को बनारस परिवहन कार्यालय में पंजीकृत हुई थी। जिसका नंबर यूपी 65 एल 0009 है उनके घर के सामने से बाइक 15 दिसंबर 2002 को चोरी हो गई थी। 18 दिसंबर 2002 सिगरा थाने में बाइक चोरी का मुकदमा दर्ज हुआ। चोरी की बाइक 6 अगस्त 2013 को आजमगढ़ कार्यालय में दर्ज होने के साथ-साथ पंजीकरण का नवीनीकरण कराया गया। 22 जनवरी 2014 को आजमगढ़ से गुड़िया सिंह की बाइक हनसापुर चिरैयाकोट निवासी मोहम्मद नजीर खान के नाम ट्रांसफर हो गई, इसके बाद आजमगढ़ के बमोहरा मुबारकपुर निवासी मोहम्मद जहीर के नाम ट्रांसफर हो गया। अधिवक्ता रामनरेश सिंह का कहना है कि मैंने एक कार खरीदी और परिवहन विभाग नई व्यवस्था के तहत पुराने नंबर को कार पर ट्रांसफर कराने आरटीओ से अनुरोध किया। तब जाकर मामला खुला। जांच में पाया गया कि उक्त बाइक आजमगढ़ कार्यालय से दो बात 2 लोगों के नाम ट्रांसफर हो चुकी है। इसकी सूचना सिगरा थाना प्रभारी को दे दी गई है। उक्त मामले में एआरटीओ प्रशासन वाराणसी सर्वेश चतुर्वेदी का कहना है कि बिना एनओसी लिए आजमगढ़ कार्यालय में बाइक कैसे दर्ज हो गई, कैसे ट्रांसफर हुआ? इसके बारे में वहां के एआरटीओ से जानकारी मांगी गई है, रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी।