सरल जीवन की संहिता है बुद्ध का जीवन-डॉ. सन्तोष

    बुद्ध पूर्णिमा भारत वर्ष में धार्मिक व सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व रखती है।बौद्ध धर्म प्रवर्तक गौतम बुद्ध का जन्मदिवस बैसाख मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है।वास्तव में गौतम बुद्ध का जीवन अपने आपमें सरल जीवन जीने की संहिता है जिसमें कर्मकाण्ड का कोई महत्व नहीं है।हमारे धर्मशास्त्र और साहित्य श्रेष्ठ विचारों से भरे पड़े हैं।हमारे महापुरुषों ने अपने जीवन में प्रयोग करके विचारों को प्रतिपादित किया,गौतम बुद्ध भी उन महापुरुषों में एक हैं।हम उनके विचारों की बात तो करते हैं, किंतु व्यवहारिक जीवन में उसका प्रयोग दूसरों को नीचा दिखाने या ढाल के रूप मेंअपनी गलतियों पर आवरण डालने के लिए करते हैं। उसपर अमल नहीं करते हैं।भगवान बुद्ध के अनुसार जितनी हानि शत्रु-शत्रु की या बैरी-बैरी की करता है उससे कहीं अधिक हानि बुरे मार्ग पर लगा हुआ चित्त करता है (Whatever harm an enemy may do to an enemy or a hater to a hater, an ill-directed mind inflicts on oneself a greater harm.)आज के कठिन समय में घायल और लहूलुहान मानवता के लिए उनके सन्देश बहुत उपयोगी हैं।उनके अप्प दीपो भव का संदेश नई मनुष्यता के जन्म लेने में सहायक हो सकता है। हमें विचारों के आवरण की नहीं बल्कि विचारों के बीज की आवश्यकता है जिससे बीजांकुर फूटे और नई कोंपले बाहर निकलें।बुद्ध ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा तथा तात्विक ज्ञान के साथ नैतिकता का समावेश करके मनुष्यों का पथ प्रदर्शन किया।उनके विचारों ने भारत की भौगोलिक सीमा लांघ कर विदेशों में भी लोगों को प्रभावित किया।श्रीलंका, जावा, सुमात्रा, फिलीपींस,जापान और चीन में लोगों ने बौद्ध धर्म को अपनाया।आधुनिक भारत के ख्याति लब्ध दार्शनिकआचार्य रजनीश ने बुद्ध के सन्देश की बहुत व्यवहारिक व्याख्या की है ।यूरोप और अमरीका में बौद्ध दर्शन से लोगों को परिचित कराया तो वहीं दूसरी तरफ अपने देश में कुछ लोग उन्हें विष्णु के अवतार के रूप में देखते हैं।बाबा साहेब अंबेडकर उनके सिद्धान्तों पर चलकर बहुजन मुक्ति का मार्ग तलाशते हैं । कुलमिलाकर सबकी अपनी अपनी दृष्टि है और बुद्ध को देखने का सबका अपना नजरिया है लेकिन उनकी स्वीकार्यता के केंद्र में अप्प दीपो भव और अहिंसा परमो धर्म का सिद्धांत है।यह बात जरूर है कि बुद्ध और अम्बेडकर को राजनीतिक दृष्टि से अपनाने वाले लोगों को अन्य भारतीय मतावलम्बियों का बुद्ध के प्रति प्रेम आपत्तिजनक लगता है। यह विचार कि मुझे गाली दी,मुझे मारा, मुझे हरा दिया,मुझे लूट लिया ऐसी बातें जो सोचते हैं और मन में बांधे रखते हैं उनका बैर कभी शांत नहीं होता। प्रेम करुणा दया अहिंसा और ज्ञान पुंज के समुच्चय भगवान बुद्ध के जन्मदिवस पर शुभकामनाएं।