विश्व फालुन दाफा दिवस स्पेशल: अभ्यास जिससे फैशन मॉडल और स्कूल भी अछूते नहीं

    वुहान में यह ध्यान अभ्यास कोरोना वाइरस महामारी के खिलाफ हुआ कारगर

    भारत में कोरोना वाइरस महामारी का प्रसार रोकने के लिए सरकार ने लोगों को अपने घरों में ही रहने की सलाह दी है। रास्ता मुश्किल है पर यह समय धैर्य रखने का है। कई लोग लॉकडाउन का सदुपयोग अपने मन को शांत और शरीर को तंदरुस्त रखने में कर रहे हैं। इस दोरान फालुन दाफा ध्यान-अभ्यास लोगों को बेहद लुभा रहा – यह अभ्यास, आध्यात्मिक विकास के साथ आपकी प्रतिरोधक शक्ति भी बड़ता है। मई 13 दुनिया भर में विश्व फालुन दाफा दिवस के रूप में मनाया जाता है।फालुन दाफा (या फालुन गोंग) बुद्ध और ताओ विचारधारा पर आधारित मन और शरीर का उच्च स्तरीय अभ्यास है जिसमें पांच सौम्य, प्रभावी व्यायाम और नैतिक गुण साधना शामिल है। व्यायाम व्यक्ति की शक्ति नाड़ियों को खोलने, शरीर को शुद्ध करने, तनाव से राहत और आंतरिक शांति प्रदान करने में सहायता करते हैं।वोग इंडिया (Vogue India) द्वारा “सर्वश्रेष्ठ हेयर स्टाइलिस्ट” से सम्मानित सेलिब्रिटी हेयर स्टाइलिस्ट गेब्रियल जॉर्जियो ने फालुन दाफा अभ्यास को अपने “शांत मन और ऊर्जा का असीम स्रोत” बताया। गेब्रियल बॉलीवुड सितारे जेसे की दीपिका पादुकोण (Deepika Padukone), अनुष्का शर्मा (Anushka Sharma), करीना कपूर (Kareena Kapoor), प्रियंका चोपड़ा (Priyanka Chopra), जेसिका अल्बा (Jessica Alba), रॉबर्ट डाउनी जूनियर (Robert Downey Jr) और ऐसे ही कई मशहूर बॉलीवुड और हॉलीवुड के बड़े सितारों के बीच अपनी चमक बिखेर चुके हैं। गेब्रियल का कहना है: “फैशन और ग्लैमर की दुनिया के मोहक बुलबुले में रहने के दौरान उसके भ्रम में खो नहीं जाना, स्वयं के प्रति ईमानदार रहना, और इस इंडस्ट्री की चकाचौंध द्वारा भ्रमित नहीं हो जाना ही सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण होता है। फालुन दाफा अभ्यास करने से मैं अपने आप में निरंतर सुधार देखता हूँ। मैं केवल बेहद स्वस्थ ही नहीं बन पाया हूँ बल्कि मेरे अंदर बहुत उर्जा आ गई है और मैं सकारात्मक महसूस करता हूँ।” डॉ. लिली फेंग, बेलोर कॉलेज ऑफ मेडिसिन, टेक्सास, में इम्यूनोलॉजी की प्रोफेसर के शोध के अनुसार फालुन दाफा बीमारियों के विरुद्ध प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाने में कारगर है। डॉ. लिली फेंग ने सफेद रक्त कोशिकाओं (न्युट्रोफिल) के जीवन काल और कार्य की जांच की जिसमे पाया गया कि फालुन दाफा अभ्यासियों के न्यूट्रोफिल का इन-विट्रो जीवन काल नियंत्रण समूहों की तुलना में 30 गुना अधिक था और वे बेहतर कार्यशील थे। यह कुछ बीमारियों के लिए प्रतिरक्षा और स्वास्थ्य लाभ को दर्शाता है। मिस्टर इंडिया फाइनलिस्ट रह चुके अधिराज चक्रबर्ती मुंबई के एक प्रतिष्ठित मॉडल और उभरते हुए फैशन फोटोग्राफर हैं जो फालुन दाफा का अभ्यास करते हैं, उनका कहना है कि जब लॉकडाउन में अधिकांश चीजें सामान्य रूप से काम नहीं कर रही हैं, यह बहुत जरूरी है कि “हम अपने मन को खाली न रखें।” उनोनें कहा इस खाली समय ने उनें फालुन दाफा अभ्यास को नियमित रूप से करने में मदद की है. “फालुन दाफा मेरे मन को शांत और संयमित रहने में मदद करता है। इसके अलावा यह अभ्यास प्रतिरोधक शक्ति को मज़बूत बनाने में मदद करता है, इसलिए सहज ही मैं काफी ऊर्जावान और सक्रिय महसूस करता हूँ।” फालुन दाफा, जिसे पहली बार चीन में मई 1992 में श्री ली होंगज़ी द्वारा सार्वजनिक किया गया, आज 114 से अधिक देशों में 10 करोड़ से अधिक लोगों में लोकप्रिय है। श्री ली को स्वतंत्र विचारों के लिए ‘सखारोव पुरस्कार’ से सम्मानित किया जा चुका है और ‘नोबेल शांति’ पुरस्कार के लिए भी पांच मनोनीत किया जा चुका है. फालुन दाफा और श्री ली होंगज़ी को, दुनियाभर में 1,500 से अधिक पुरस्कारों और प्रशस्तिपत्रों से भी नवाज़ा गया है. स्वस्थ शरीर से सब कुछ हासिल किया जा सकता है, शायद यही कारन है की फालुन दाफा साधना अभ्यास बैंगलोर, नागपुर, लेह, लद्दाख, वाराणसी के विभिन्न स्कूलों में भी लोकप्रिय हुआ है। जहां छात्र इन व्यायामों को सुगमता से करते रहे हैं, शिक्षक छात्रों के व्यवहार और शैक्षणिक परिणामों में सुधार से प्रसन्न हैं। क्रोनावायरस के प्रकोप को रोकने के लिए लॉकडाउन दोरान कई बच्चे अब स्कूल नहीं जा रहे हैं तो फ्री ऑनलाइन फालुन दाफ़ा अभियास क्लास में हिस्सा ले रहे हैं. हल ही में मई 2-3 और मई 9-10 को मुंबई में वर्कशॉप हुई। फालुन दाफा नागपुर और उसके आसपास के कई स्कूलों में लोकप्रियता हासिल कर रहा है। जीजामाता हाई स्कूल और जूनियर कॉलेज के प्रिंसिपल ने एक ही समय में हाई स्कूल और कॉलेज स्तर की कक्षाओं में छात्रों को अभ्यास सिखाने के लिए व्यवस्था की। प्रिंसिपल और शिक्षकों ने फालुन गोंग के सत्य-करुणा-सहनशीलता के सिद्धांतों की प्रशंसा की, और कई प्रश्न पूछे। स्कूल के अकादमिक स्टाफ के कई सदस्यों ने अभ्यास के बारे में और अधिक सीखने की इच्छा जताई। बैंगलोर के पास चिंतामणि टाउन में, ज्योति स्कूल के प्रिंसिपल, श्री वर्की ने स्वयं फालुन दाफा के चमत्कारी स्वास्थ प्रभावों का अनुभव करने पर शिक्षकों और छात्रों को अभ्यास सिखाया। श्री वर्की ने बताया कि फालुन दाफा सीखने से पहले उनका स्वास्थ्य खराब रहता था, लेकिन साधना अभ्यास के बाद, उन्होंने व्यापक शारीरिक और आध्यात्मिक परिवर्तनों का अनुभव किया। इसलिए उन्होंने शिक्षकों और छात्रों को भी अभ्यास के लिए प्रेरित किया। श्री वर्की ने बताया कि फालुन दाफा का अभ्यास करने से पहले, स्कूल में छात्रों के शैक्षणिक परिणाम औसत रहते थे, और कई छात्र अवज्ञाकारी थे और खराब व्यवहार का प्रदर्शन करते थे। फालुन गोंग के अभ्यास के बाद, बुरे व्यवहार वाले छात्रों के व्यवहार में बदलाव आया, और स्कूल के शैक्षणिक परिणामों में सुधार हुआ।
    फालुन दाफा के स्वास्थ्य लाभ और आध्यात्मिक शिक्षाओं के कारण यह चीन में इतना लोकप्रिय हुआ कि 1999 तक करीब 7 से 10 करोड़ लोग इसका अभ्यास करने लगे जो चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की 6 करोड़ मेम्बरशिप से ज्यादा थे। कम्युनिस्ट पार्टी की नास्तिक विचारधारा के कारण चीन के शासकों ने फालुन दाफा की बढ़ती लोकप्रियता को अपनी प्रभुसत्ता के लिए चुनौती माना और 20 जुलाई 1999 को इस पर पाबंदी लगा दी और क्रूर दमन आरम्भ कर दिया जो आज तक जारी है। पिछले तीन महीनो से वुहान कोरोना वाइरस महामारी का गढ़ रहा है, जहाँ 83,959 केस दर्ज हुए हैं जिसमे करीब 4,512 लोगों कि मृत्यु हो चुकी है। इतनी विषम परिस्थतियों में भी वुहान के फालुन दाफा अभ्यासी न केवल खुद को महामारी संक्रमण से बचा पाए हैं बल्कि संकट में घिरे वुहान वासियों को फालुन दाफा के स्वास्थ्य लाभ और इसका सत्य, करुणा और सहनशीलता का सन्देश पहुंचा रहे हैं। वुहान के फालुन दाफा अभ्यासियों का यह निस्वार्थ प्रयास निश्चित ही प्रशंसनीय है.