ज्ञान, विज्ञान, शोध और मानवता विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी

    उच्च शिक्षा और अनुसंधान ही किसी राष्ट्र के विकास और प्रगति की रीढ़ होते हैं।  यह सच है कि स्वतंत्र भारत में उच्च शिक्षा का विस्तार व्यापक स्तर पर हुआ लेकिन क्या‌ यह शिक्षा छात्रों को जीवन दृष्टि देने में या उनकी भौतिक आवश्यकताओं की पूर्ति करने में सफल हुई है। आज विश्वविद्यालयी शिक्षा को कुछ हद तक सफल माना जा सकता है लेकिन सुफल नहीं। हमने ज्ञान और विज्ञान के क्षेत्र में प्रगति तो की है लेकिन उदारता,और सहानुभूति और मनुष्य होने के मामले में काफी पीछे छूट गये।इसी लिए सफल तो हुए हैं पर सुफल नहीं। उपरोक्त बाते केन्द्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान सारनाथ में आयोजित एक दिवसीय वेबिनार”वर्तमान भारत में विश्वविद्यालयी शिक्षा: उपलब्धियां, विफलताएं, चुनौतियां”नामक विषय पर बोलते हुए विद्वानों ने कहीं।
    कार्यक्रम के शुरूआत में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के पूर्व कुलपति प्रो.के पी पाण्डेय ने कहा विश्वविद्यालय को लाइट हाउस की तरह होना चाहिए जहां ज्ञान के साथ-साथ चरित्र और प्रज्ञा का निर्माण हो।इसके लिए विश्वविद्यालय की उपसंस्कृति में बदलाव की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारत के विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में बदलाव बहुत जरूरी है।आज विश्वविद्यालयों में अच्छे ब्रेन की कमी है। कार्यक्रम की अगली कड़ी में जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय की वर्तमान कुलपति प्रो.कल्पलता पाण्डेय ने अपने विचार रखते हुए कहा कि शिक्षा का कार्य है सामर्थ्य प्रदान करना। जबसे शिक्षा ने सामर्थ्य प्रदान करना बंद कर दिया तब से ज्यादा समस्याओं ने जन्म ले लिया है। उन्होंने ने बताया कि दूसरी समस्या है उच्च कोटि की पाठ्य सामग्री का अभाव।यह विदित है कि कुछ टॉप संस्थान को छोड़ दें तो आर्थिक अभाव, उपलब्धता, अद्यतन जानकारी जैसी कमी के कारणों से अधिकांश शिक्षकों, विद्यार्थियों को पठन- पाठन के लिए दूसरे दर्जे की घिसी-पिटी सामाग्री पर निर्भर रहना पड़ता है। अमेरिका, हावर्ड,अथवा विश्व के अन्य उच्च स्तरीय संस्थान या अनेक यूरोपीय विश्वविद्यालय मुफ्त में इ लर्निंग मैटेरियल विद्यार्थियों को उपलब्ध करा रहें हैं। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के पूर्व कुलपति डॉ.पृथ्वीश नाग ने सिस्टम में जो कमियां हैं उन पर अपने विचार रखा और कहा कि हमें मैकाले वाले मैथड से अलग जाकर सोचना होगा। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय विश्वविद्यालय और राज्य विश्वविद्यालय के फंडिंग और पाठ्यक्रम में जो असमानता है उसे दूर करने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि देश के केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में जहां 20प्रतिशत छात्र पढ़ते हैं उन विश्वविद्यालयों को पूरे शिक्षा बजट का 80 प्रतिशत धन आवंटित किया जाता है वहीं दूसरी ओर राज्य विश्वविद्यालयों में 80प्रतिशत विद्यार्थी अध्ययनरत हैं वहां कुल बजट का केवल 20प्रतिशत धन आवंटित होता है जिससे काफी असमानता उत्पन्न होता है।जब देश के कालेजों के स्तर को उच्च स्तर के संस्थानों के बराबर सुविधाएं नहीं प्रदान की जायेगी यह असमानता रहेगी और शिक्षा के स्तर में असमानता रहेगी। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी ने कहा कि आज मानव सभ्यता कैसे सुरक्षित रहे इस विषय को विश्वविद्यालयी पाठ्यक्रम में जोड़ने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि जहां दुनिया के सभी शुभ विचार, मानवता के सारे गुण उत्पन्न होते हैं उसे विश्वविद्यालय कहते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य के रचना का निर्माण विश्वविद्यालय ही कर सकते हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे केन्द्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान सारनाथ के कुलपति ने कहा कि विज्ञान आज की जरूरत है पर शील, समाधि,प्रज्ञा के बिना यह विज्ञान अधूरा है। मनुष्य का सम्पूर्ण विकास नैतिकता,शील,समाधि और प्रज्ञा के बिना अधूरा है। उन्होंने जोर दिया कि केवल विज्ञान से मनुष्य हिंसक हो जायेगा।विश्व के तमाम उपद्रव इसके प्रमाण हैं।हम जब तक व्यवहारिक और आध्यात्मिक स्तर पर मजबूत नहीं होंगे तब तक विश्व में हिंसा और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। भारत जैसे देश में यह ताकत है कि वह शिक्षा को ज्ञान, विज्ञान के साथ प्रज्ञावान बना सकता है। उन्होंने कहा कि कि शिक्षा का मूल यह होना चाहिए कि उसमें उस देश का मूल संस्कार परिलक्षित हो, क्योंकि मूल संस्कार के बिना हमारा स्वभाव बदल जायेगा।यह देश सद्भाव और ज्ञान परम्परा का देश है जहां हिंसा के लिए कोई जगह नहीं। यहां सबको गले लगाकर आगे बढ़ने की परम्परा रही है।यह राम, कृष्ण और बुद्ध की भूमि है जहां मूल संस्कार केन्द्र में रहा है।आज की शिक्षा में ज्ञान, विज्ञान के साथ मूल संस्कार की बहुत जरूरत है। संस्थान के कुल सचिव डॉ.आर के उपाध्याय ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।अंत में सीटीई विभाग के डायरेक्टर डॉ.हिमाशु पाण्डेय ने सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम का संचालन कार्यक्रम के आयोजक डॉ. सुशील कुमार सिंह ने किया। इस कार्यक्रम में डॉ नेहा सिंह प्रवक्ता महादेव पीजी कालेज वाराणसी ,सुधांशु कुमार सिंह(सामाजिक एवं आर टी आई )कार्यकर्ता समेत अन्य लोगों ने प्रतिभाग किया।