कौशांबी पटाखा फैक्ट्री विस्फोट मामला! गुटके की वजह से बच गई युवक की जान

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विस्फोट में सात की दर्दनाक मौत हो गई थी, वहीं आठ गंभीर रूप से घायल है जिनका इलाज हॉस्पिटल में चल रहा है

प्रखर कौशांबी। कहा जाता है कि गुटखा खाने से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है। लेकिन आज गुटके ने एक शख्स की जान बचा ली। सुनकर अजीब लग रहा होगा, लेकिन बिल्कुल सही है। मामला कौशांबी जनपद का है रविवार की सुबह पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट के बाद कई लोगों की जान चली गई। लेकिन गुटके ने इस शख्स को बचा लिया। बता दे कि जिले में रविवार को पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट में 7 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। इसमें 8 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। पोस्टमार्टम के बाद आज भारी पुलिस फोर्स की मौजूदगी में सभी शवो का अंतिम संस्कार कर दिया गया। हादसे के वक्त वहां 16 लोग काम कर रहे थे। इनमें से एक सुरक्षित बचे शख्स ने खुद के बचने की कहानी बताई है। कौशांबी हादसे के चश्मदीद नरेश पटेल ने बताया कि फैक्ट्री में कुल 16 लोग काम कर रहे थे। मैं गुटखा खाया हुआ था। कुल्ला करने के लिए फैक्ट्री के बाहर परिसर में निकला था। जनरेटर चल रहा था। जनरेटर की चिंगारी से तेज धमाका हुआ। जिससे फैक्ट्री जमीदोज हो गई। मुझे छोड़कर सभी 15 लोग मलबे में दब गए। एक घंटे तक मैं भी अंदर घायल हालत में जमीन पर पड़ा रहा। एक घंटे बाद रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। जिसके बाद सभी को बाहर निकाला गया। हादसे के बाद सरकार ने मृतक के परिजनों को मुख्यमंत्री राहत कोष से 2-2 लाख और घायलों को 50-50 हजार रुपए की आर्थिक मदद किए जाने की घोषणा की है। इसके साथ ही अन्य योजनाओं से लाभाविन्त किए जाने का आश्वासन दिया गया है। घटना कोखराज थाना इलाके के भरवारी की है। यहां रविवार की दोपहर पटाखा फैक्ट्री में तेज धमाका हुआ था। सभी घायलों को प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल में एडमिट कराया गया है। जहां उनकी हालत नाजुक बनी है। मरने वालो में 50 वर्षीय अशोक कुमार, 25 वर्षीय शिवनारायण, 19 वर्षीय शिवाकांत अमहा गांव के रहने वाले थे। जबकि 18 वर्षीय जयचंद्र बैरिहा गांव का रहने वाला था। पटाखा फैक्ट्री संचालक 35 वर्षीय शाहिद अली खल्लाबद का रहने वाला था। जबकि 40 वर्षीय हरिलाल, 45 वर्षीय सोनेलाल चमंधा गांव का रहने वाले थे। एडीएम न्यायिक प्रबुद्ध सिंह ने बताया कि सभी शवों का अंतिम संस्कार किया गया है। मृतक के परिजनों को मुख्यमंत्री राहत कोष से 2-2 लाख और घायलों को 50-50 हजार की आर्थिक मदद की जाएगी। इसके साथ ही परिजनों को अन्य सरकारी योजनाओं से भी लाभाविन्त किया जाएगा। वहीं पटाखा फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों को दरकिनार करने के सवाल पर एडीएम ने कहा कि पटाखा फैक्ट्री का लाइसेंस था। जिसकी अवधि 2027 तक थी. पूरे मामले में जांच के लिए टीम गठित की गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।