राजस्थान के कोटा और जोधपुर के बाद अब गुजरात के अहमदाबाद और राजकोट में 219 बच्चों की मौत!

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prakhar purvanchal
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– राजस्थान के कोटा और जोधपुर में सैकड़ों बच्चों की हुई थी मौत

– अहमदाबाद और राजकोट में 219 बच्चों की मौत

प्रखर अहमदाबाद। राजस्थान के कोटा और जोधपुर में नवजात बच्चों के मौत की खबर ने देश में हलचल मचा रखी है। इसी बीच अब गुजरात के अहमदाबाद और राजकोट से खबर आ रही है कि वहां भी महीने भर के अंदर 219 नवजात शिशुओं की मौत हो चुकी है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, अहमदाबाद सिविल अस्पताल में पिछले महीने यानी दिसंबर में 85 बच्चों की मौत हो गई, जबकि राजकोट में एक महीने में 134 बच्चों ने दम तोड़ दिया है। ये आंकड़े डराने वाले हैं। गुजरात में दिसंबर 2019 में 85 बच्चों की मौत हुई है तो वहीं नवंबर में 74, जबकि अक्टूबर में 94 बच्चों ने दम तोड़ा है। इतना ही नहीं राजकोट के चिल्ड्रन हॉस्पिटल में एक साल में 1235 बच्चों की मौत हो गई है। जो गुजरात में स्वास्थ्य सुविधाओं का हाल बयां कर रहा है। इस मामले पर अहमदाबाद के सिविल अस्पताल के सुप्रीटेंडेंट डॉक्टर गुणवंत राठौर का कहना है, ‘हर महीने 400 से ज्यादा बच्चे अस्पताल में दाखिल होते हैं, उस हिसाब से मृत्यु दर 20 फीसदी जितना ही है। यहां सुविधाओं की कोई कमी नहीं है, निजी अस्पतालों और बाकी सरकारी अस्पतालों से बच्चा क्रिटिकल कंडीशन में सरकारी अस्पताल भेजा जाता है। गौरतलब है कि प्राइवेट हॉस्पिटलों द्वारा लूटे जाने के बाद अभिभावक अपने बच्चों को लेकर सरकारी अस्पताल जाता है। तब तक उसकी आर्थिक स्थिति से लेकर सारी परिस्थितियां बिगड़ गई होती हैं।जिनके बाद उनका संभलना मुश्किल होता है। ऐसे में सरकारी आंकड़ों में अस्पतालों में होने वाली मौतें सबसे ज्यादा सरकारी अस्पतालों से मिलती हैं। लेकिन इसके पीछे बड़ा कारण यह है कि अभिभावक पहले अपने बच्चों को लेकर प्राइवेट अस्पतालों में जाते हैं जहां उनका आर्थिक मानसिक और शारीरिक दोहन होता है। उसके बाद परिस्थितियां बिगड़ने के बाद उन्हें सरकारी अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। लेकिन आंकड़े यह भी कहते हैं कि सरकारी अस्पतालों से स्वस्थ होकर जाने वाले बच्चों का भी प्रतिशत सबसे ज्यादा होता है। बता दें कि राज्य सरकार ने खुद विधानसभा में स्वीकार किया था कि 2019 तक गुजरात में कुपोषण से 1,41,142 बच्चे पीड़ित हैं। जबकि आदिवासी इलाकों में कुपोषण की हालत और भी खराब है। जबकि कुपोषण के खिलाफ केंद्र और राज्य सरकार द्वारा कुपोषण से लड़ने के लिए तमाम योजनाएं चलाई जाती हैं। इसके बाद भी अगर कुपोषण से मौतें हो रही हैं तो यह सरकार पर बड़े सवाल खड़े करती है।

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